हालिया पोस्टल बैलट (Postal Ballot) में, Williamson Financial Services Ltd के शेयरधारकों ने श्री श्याम रतन मुंद्रा को मैनेजर (Manager) के तौर पर फिर से नियुक्त करने का ज़ोरदार समर्थन किया है। मतदान में लगभग 99% शेयरधारकों ने उनके पक्ष में वोट दिया, जो कंपनी के लिए नेतृत्व में स्थिरता (Stability) लाता है।
4 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुए मतदान के नतीजे, एक स्क्रूटिनाइज़र की रिपोर्ट के अनुसार, 6 अप्रैल, 2026 को घोषित किए गए। प्रस्ताव के पक्ष में 98.87% वोट पड़े, जबकि केवल 1.13% वोटों ने इसके खिलाफ मतदान किया।
श्री मुंद्रा, जो अप्रैल 2015 से कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) भी हैं और 2009 से Williamson Financial Services से जुड़े हैं, इस पद पर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। 41 वर्षों से अधिक का ऑडिट और अकाउंटिंग का अनुभव रखने वाले श्री मुंद्रा कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। उनकी लगातार मौजूदगी को कंपनी की रणनीतिक योजनाओं को लागू करने और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Williamson Financial Services एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ रजिस्टर्ड है। यह लीज़ फाइनेंसिंग, एडवाइजरी और कैपिटल मार्केट ऑपरेशंस जैसी सेवाएं प्रदान करती है।
हालांकि, इस भारी समर्थन के बावजूद, कंपनी कुछ गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ऑडिटर ने एक क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) जारी किया है।
इसके अलावा, असुरक्षित ऋणों (Unsecured Loans) की एक बड़ी रकम की रिकवरी और नियामक मानदंडों (Regulatory Norms) के अनुसार उनके वर्गीकरण को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) द्वारा टाटा कैपिटल लिमिटेड (Tata Capital Limited) के पक्ष में सुनाया गया ₹33 करोड़ का फैसला भी एक अनसुलझा कानूनी मामला है।
वित्तीय मोर्चे पर, Williamson Financial Services ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में अपने नेट ऑपरेटिंग लॉस (Net Operating Loss) को ₹471.81 लाख से घटाकर ₹444.74 लाख कर लिया है। 31 मार्च, 2025 तक, कंपनी पर कुल ₹44,078.61 लाख का उधार था, जिसमें सिक्योरड और अनसिक्योरड दोनों तरह के लोन शामिल हैं।
आने वाली तिमाहियों में, निवेशक श्री मुंद्रा के नेतृत्व में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर करीब से नज़र रखेंगे। ऑडिटर की चिंताओं, बकाया असुरक्षित ऋणों की वसूली और टाटा कैपिटल मामले के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित रहेगा।
