Vivimed Labs SEBI नियम से बाहर! 'लार्ज कॉर्पोरेट' का दर्जा नहीं, कर्ज लेने के नियम आसान

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AuthorNeha Patil|Published at:
Vivimed Labs SEBI नियम से बाहर! 'लार्ज कॉर्पोरेट' का दर्जा नहीं, कर्ज लेने के नियम आसान
Overview

SEBI के नियमों के तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के मापदंडों पर खरा न उतरने की घोषणा के बाद Vivimed Labs Ltd ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने **6 अप्रैल, 2026** को स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया है कि वह इस श्रेणी में नहीं आती, जिससे उस पर लागू होने वाले कुछ खास कर्ज (debt) जुटाने के नियमों से उसे छूट मिल गई है।

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Vivimed Labs Limited ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजे एक एलान में साफ किया है कि वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 'लार्ज कॉर्पोरेट (LC)' फ्रेमवर्क के तहत परिभाषित 'बड़ी कॉर्पोरेट इकाई' नहीं है। यह एलान 6 अप्रैल, 2026 को किया गया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह एलान?

SEBI ने बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क लागू किया था। इस फ्रेमवर्क के तहत, पहचानी गई कंपनियों को कर्ज (debt) जुटाने और खुलासे (disclosure) संबंधी विशेष नियमों का पालन करना होता है। LC न माने जाने का मतलब है कि Vivimed Labs पर ये खास नियामक दायित्व लागू नहीं होंगे। यह कंपनी की वर्तमान वित्तीय स्थिति और कानूनी चुनौतियों को देखते हुए काफी अहम है।

SEBI का 'लार्ज कॉर्पोरेट' ढांचा क्या है?

SEBI ने 26 नवंबर, 2018 के सर्कुलर (SEBI/HO/DDHS/CIR/P/2018/144) के जरिए यह ढांचा पेश किया था। यह आमतौर पर लिस्टेड कंपनियों (बैंकों को छोड़कर) पर लागू होता है, जिनके पास लिस्टेड सिक्योरिटीज हों और ₹100 करोड़ (बाद में यह सीमा बढ़ाकर ₹1000 करोड़ कर दी गई) या उससे अधिक का बकाया लॉन्ग-टर्म कर्ज हो, साथ ही उनका क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे ऊपर का हो।
SEBI के नियम के मुताबिक, LC कंपनियों को अपने कुल कर्जों का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज के जरिए जुटाना अनिवार्य होता है। यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2019 से प्रभावी हुई थी।

अब क्या बदलेगा?

LC श्रेणी में न आने के कारण, Vivimed Labs SEBI के उस विशेष नियम से मुक्त है, जिसके तहत उसे अपने कर्जों का एक हिस्सा डेट सिक्योरिटीज के माध्यम से जुटाना पड़ता। इसके साथ ही, इस ढांचे से जुड़े खुलासे की जरूरतों से भी कंपनी बच जाएगी।

कंपनी के सामने जोखिम

Vivimed Labs को मौजूदा समय में गंभीर वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹165.66 मिलियन हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹74.45 मिलियन था। वहीं, रेवेन्यू भी ₹186.59 मिलियन से गिरकर ₹116.31 मिलियन पर आ गया। कंपनी के ऑडिटर ने भी कुछ खास बातों पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया है, जिसमें अनप्रोवाइडेड इंटरेस्ट चार्ज और चल रही फोरेंसिक ऑडिट शामिल हैं।
इसके अलावा, कंपनी नवंबर 2025 में दर्ज CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) के एक बैंक फ्रॉड मामले में भी उलझी हुई है, हालांकि हाई कोर्ट से फिलहाल अंतरिम राहत मिल चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी पर कर्ज का भारी बोझ (high leverage) और निगेटिव EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) जैसी समस्याएं हैं, जिसके चलते इसे टेक्नीकल आधार पर 'स्ट्रॉन्ग सेल' रेटिंग मिली हुई है।

समान स्थिति वाली दूसरी कंपनियां

Vivimed Labs अकेली नहीं है जिसने ऐसी घोषणा की है। Prime Fresh Limited ने भी 6 अप्रैल, 2026 को BSE को सूचित किया था कि वह SEBI के इसी सर्कुलर के तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट (LC)' नहीं है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.