SEBI के नए नियमों के तहत, जो कंपनियां तय सीमा से बड़ी होती हैं, उन्हें कई अतिरिक्त अनुपालन (compliance) और फंड जुटाने के सख्त नियम मानने होते हैं। लेकिन Vijay Solvex Limited ने इस दायरे में न आने की पुष्टि की है।
कंपनी ने 15 अप्रैल 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि 31 मार्च 2026 तक उनका कोई भी उधार (outstanding borrowing) NIL यानी शून्य था। इसका सीधा मतलब यह है कि Vijay Solvex को 'Large Corporate' की कड़ी शर्तों से छूट मिल गई है।
SEBI ने 26 नवंबर 2018 के एक सर्कुलर के जरिए 'Large Corporate' फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी। इसके तहत बड़ी कंपनियों के लिए अनिवार्य क्रेडिट रेटिंग और कर्ज (debt) के जरिए फंड जुटाने के नियम तय किए गए थे। इस ढांचे से बाहर रहने का मतलब है कि Vijay Solvex को इन अतिरिक्त और जटिल अनुपालन की जरूरत नहीं होगी, जिससे उनका रेगुलेटरी काम आसान हो जाता है।
Vijay Solvex, जो 1987 में स्थापित हुई थी, मुख्य रूप से एडिबल ऑयल सेक्टर में काम करती है। 'Scooter' जैसे ब्रांड के तहत वे वनास्पति घी, रिफाइंड ऑयल और डी-ऑयल्ड केक बनाती है। कंपनी के सिरेमिक और विंड पावर जैसे दूसरे बिज़नेस भी हैं, लेकिन उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा एडिबल ऑयल से आता है। यह Raghuvar (India) Limited और Deepak Vegpro Pvt. Ltd. जैसे ग्रुप का भी हिस्सा है।
शेयरधारकों के लिए, यह खुलासा बताता है कि Vijay Solvex एक छोटी कंपनी के तौर पर काम कर रही है, जिस पर SEBI के 'Large Corporate' ढांचे की तरह की विस्तृत खुलासे और फंड जुटाने की बाध्यताएं नहीं हैं। यह उनके NIL Borrowing स्टेटस और कम लीवरेज्ड बैलेंस शीट के अनुरूप है।
निवेशकों को कंपनी के भविष्य के वित्तीय खुलासों पर नजर रखनी चाहिए, खासकर उधार की स्थिति या कॉर्पोरेट वर्गीकरण में किसी भी बदलाव के लिए। कंपनी के मुख्य एडिबल ऑयल व्यवसाय और अन्य सेगमेंट में उसके प्रदर्शन पर नजर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
