Viceroy Hotels ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ अपनी लंबी कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने मार्च 2019 में ED द्वारा जारी प्रॉपर्टी अटैचमेंट के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह फैसला कंपनी की सफल इंसॉल्वेंसी (Insolvency) प्रक्रिया और उसे मिले कानूनी संरक्षण पर आधारित है।
इस फैसले के बाद, हैदराबाद में स्थित Courtyard by Marriott होटल समेत कंपनी की कई प्रमुख संपत्तियां अब अटैचमेंट के दायरे से बाहर आ गई हैं। इससे कंपनी को लम्बे समय से चली आ रही कानूनी मुसीबतों से मुक्ति मिली है और उसकी प्रमुख संपत्तियों पर से 'लीगल ओवरहैंग' (Legal Overhang) हट गया है।
यह नई कानूनी निश्चितता (Legal Certainty) कंपनी के संचालन और भविष्य की योजनाओं के लिए बेहद अहम है। अब फ्री हुई संपत्तियां कंपनी के लिए वैल्यू क्रिएशन (Value Creation) और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (Operational Flexibility) के नए अवसर खोल सकती हैं।
गौरतलब है कि Viceroy Hotels 2018 में इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में चली गई थी। इसके बाद मार्च 2019 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और बैंक फ्रॉड (Bank Fraud) के आरोपों के चलते सुजाना ग्रुप (Sujana Group) और अन्य से जुड़ी संपत्तियों को ₹315 करोड़ का बताया था, जिन्हें अटैच कर लिया गया था। सितंबर 2019 में इस अटैचमेंट को कन्फर्म (Confirm) भी कर दिया गया था।
हालांकि, नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 6 अक्टूबर 2023 को कंपनी की रेज़ोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को मंजूरी दी थी, जिसके बाद कंपनी इंसॉल्वेंसी से बाहर आई। यह नया ट्रिब्यूनल फैसला इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध कानूनी सुरक्षा का उपयोग करते हुए, पहले के ED अटैचमेंट को रद्द करता है।
अब कंपनी की संपत्तियां पूरी तरह से मुक्त हो गई हैं और लंबी कानूनी लड़ाई का आधिकारिक तौर पर अंत हो गया है। यह फ्री हुई संपत्तियां अब विकास, साझेदारी या अन्य पहलों के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं ताकि इनकी वैल्यू को बढ़ाया जा सके। कंपनी अब परिसंपत्ति अटैचमेंट की चिंता के बिना अपने मुख्य हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) व्यवसाय पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकती है।
हालांकि, निवेशकों ने मार्च 2025 तक के डिस्क्लोजर (Disclosure) फाइल करने में हुई एक दिन की देरी पर भी ध्यान दिया है, जिसके लिए स्टॉक एक्सचेंजों ने ₹5,000 का जुर्माना लगाया था। ED के मूल आरोप गंभीर बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े थे, जिन्हें इस मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा संबोधित किया गया है।
