Q4 में चमकी Trio Mercantile, पर साल भर की कहानी थोड़ी जुदा
Trio Mercantile & Trading Ltd के लिए चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। कंपनी का स्टैंडअलोन टोटल रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 544.53% उछलकर ₹1.50 करोड़ पर पहुंच गया। इस मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ के दम पर कंपनी ने तिमाही के लिए ₹0.08 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया।
साल भर के नतीजों पर एक नजर
पूरे फाइनेंशियल ईयर 26 की बात करें तो, कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 49.20% बढ़कर ₹3.53 करोड़ रहा। लेकिन, साल के अंत में कंपनी ₹0.05 करोड़ के स्टैंडअलोन नेट लॉस में रही। इन नतीजों पर पिछले सालों के लिए ₹0.10 करोड़ (₹9.93 लाख) के विशेष खर्च और ₹0.04 करोड़ (₹3.87 लाख) की टैक्स प्रोविजन का भी असर रहा।
निवेशकों के लिए क्या हैं अहम बातें?
Q4 में रेवेन्यू की यह जोरदार ग्रोथ बिजनेस एक्टिविटी में तेजी का संकेत देती है। मगर, पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए लगातार नेट लॉस यह दिखाता है कि कंपनी अभी भी कंसिस्टेंट प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने के लिए जूझ रही है। सबसे बड़ी चिंता नॉन-करंट बोरिंग्स (कर्ज) में भारी बढ़ोतरी की है, जो FY25 के ₹0.12 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹1.50 करोड़ हो गई है, यानी इसमें करीब 13 गुना की उछाल आई है। यह इजाफा कंपनी के फाइनेंशियल रिस्क को बढ़ाता है।
इसके अलावा, ऑडिटर की तरफ से कुछ पार्टियों को दिए गए बिना ब्याज वाले असुरक्षित लोन (unsecured, interest-free loans) पर की गई खास टिप्पणी निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली है। ऐसे अरेंजमेंट कैपिटल एलोकेशन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
शेयरहोल्डर्स अब मैनेजमेंट से यह उम्मीद करेंगे कि कंपनी कंसिस्टेंट सालाना प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में अपनी रणनीति बताए। बढ़ते कर्ज को ठीक से मैनेज करना कंपनी के लिए अहम होगा ताकि भविष्य में फाइनेंशियल दबाव से बचा जा सके। ऑडिटर द्वारा इंटरेस्ट-फ्री लोन पर की गई टिप्पणियों पर भी मैनेजमेंट को स्पष्टीकरण देना होगा।