लिक्विडिटी के लिए फंड जुटाया
Tata Communications ने 7.85% प्रति वर्ष की डिस्काउंट रेट पर ₹750 करोड़ का कमर्शियल पेपर (CP) सफलतापूर्वक जारी किया है। यह CP 24 अप्रैल, 2026 को मैच्योर होगा।
फाइलिंग और जारी करने का विवरण
कंपनी ने 27 मार्च, 2026 को ₹750 करोड़ मूल्य के कमर्शियल पेपर (CP) के अलॉटमेंट की जानकारी दी। 25 मार्च, 2026 को इश्यू किया गया यह CP 24 अप्रैल, 2026 को मैच्योर होगा और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) पर लिस्ट हुआ।
फंड जुटाने का मकसद
इस फंड जुटाने का मुख्य उद्देश्य कंपनी की शॉर्ट-टर्म फंडिंग जरूरतों को पूरा करना और लिक्विडिटी बनाए रखना है। यह ₹750 करोड़ का इनफ्यूजन (Infusion) कैश रिजर्व को बढ़ाएगा, जिससे कंपनी को अपने ऑपरेशन्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में चल रहे निवेश में मदद मिलेगी।
कर्ज का भारी बोझ
वित्तीय मोर्चे पर, कंपनी पर कर्ज का बड़ा बोझ है। नवंबर 2025 तक इसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो लगभग 467.5% था, और कुल कर्ज करीब ₹133.3 अरब था। इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 2.5 है, जो ऑपरेटिंग कमाई से कर्ज चुकाने पर दबाव का संकेत देता है। हालांकि, मार्च 2025 तक कंपनी का नेट डेट टू PBILDT रेशियो 2.40x 'कम्फर्टेबल' माना गया है, जो सालाना कमाई और पर्याप्त अन-एनकम्ब्रड कैश से सपोर्टेड है। कर्ज की औसत लागत 6-6.5% के आसपास है।
मुख्य जोखिम और रेगुलेटरी कंसर्न
Tata Communications को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (DoT) से 2005-2024 तक के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) ड्यूज के लिए लगभग ₹7,800 करोड़ की डिमांड नोटिस का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी इसे अपने लाइसेंस टाइप के आधार पर चुनौती दे रही है। इसके अलावा, नवंबर 2023 में RBI ने एक सब्सिडियरी पर रेगुलेटरी कंप्लायंस में कमी के लिए ₹2 करोड़ का जुर्माना लगाया था। हालांकि, हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के एक जमीन प्लॉट पर लंबे समय से चल रहे मुकदमे की आलोचना करते हुए राज्य पर ₹25 लाख का हर्जाना लगाया था।
इंडस्ट्री पीयर्स
सेक्टर में Tata Communications के पीयर्स जैसे RailTel Corporation of India का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 3.3% है, जो Tata Communications के उच्च लिवरेज को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या
निवेशक कंपनी की ओर से भारी कर्ज चुकाने की क्षमता पर नजर रखेंगे, खासकर डिजिटल सेवाओं में लगातार रेवेन्यू ग्रोथ के बीच। DoT से AGR ड्यूज का समाधान और भविष्य के क्रेडिट रेटिंग आउटलुक पर भी नजर रहेगी। कमर्शियल पेपर जैसे शॉर्ट-टर्म फंडिंग इंस्ट्रूमेंट्स तक निरंतर पहुंच कंपनी की लिक्विडिटी मैनेजमेंट में मार्केट के भरोसे को दर्शाएगी।