शेयरधारकों की मुहर, पर कंपनी की मुश्किलें बरकरार!
Skyline Ventures India Ltd के शेयरधारकों ने कंपनी के भविष्य के लिए लिए गए सभी नौ अहम प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है। हाल ही में हुए पोस्टल बैलेट (postal ballot) में 99.9986% वोट प्रस्तावों के पक्ष में पड़े, जो शेयरधारकों के बड़े विश्वास को दर्शाता है। इन प्रस्तावों में कंपनी की उधार लेने की शक्तियों (borrowing powers) में भारी बढ़ोतरी और SPVO Two Point O Ventures Tech Private Limited का अधिग्रहण सबसे प्रमुख था।
क्या-क्या हुआ पास?
28 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुई वोटिंग अवधि में, शेयरधारकों ने SPVO Two Point O Ventures Tech Private Limited के 100% इक्विटी शेयर ₹1,00,000 में खरीदने को हरी झंडी दे दी। इसके साथ ही, कंपनी एक्ट, 2013 की धारा 180(1)(C) के तहत कंपनी की उधार लेने की शक्तियों को बढ़ाने की मंजूरी भी दी गई। अन्य प्रस्तावों में संपत्ति की बिक्री, नए निवेश करने, नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) से 24% तक पेड-अप कैपिटल की सीमा में निवेश स्वीकार करने और M/s. GVR and Associates को 5 साल के लिए सेक्रेटरियल ऑडिटर (secretarial auditor) नियुक्त करने जैसे अहम फैसले शामिल थे।
अधिग्रहण और विस्तार की राह खुली...
इन मंजूरियों से Skyline Ventures India को रणनीतिक विकास (strategic growth) और वित्तीय लचीलेपन (financial flexibility) की राह मिली है। SPVO Two Point O Ventures Tech Private Limited का अधिग्रहण कंपनी को आईटी सेवा क्षेत्र (IT services sector) में प्रवेश दिलाएगा, जबकि बढ़ी हुई उधार सीमा भविष्य की विस्तार योजनाओं को पंख लगा सकती है। संपत्ति की बिक्री और नए निवेश के अधिकार प्रबंधन को बड़ी सहूलियत देंगे। हाल ही में बोर्ड में हुए बदलावों का मकसद गवर्नेंस (governance) और अनुपालन (compliance) को मजबूत करना भी है।
...मगर सवालों के घेरे में कंपनी
हालांकि, ये कॉरपोरेट एक्शन ऐसे समय में हुए हैं जब कंपनी गंभीर वित्तीय संकट, धोखाधड़ी के आरोपों और इंसॉल्वेंसी (insolvency) की कार्यवाही से जूझ रही है। 1988 में स्थापित यह कंपनी, जो निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में काम करती है, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के अंत तक ₹0 रेवेन्यू (revenue) दर्ज किया। कंपनी के 92.87% शेयर खुदरा निवेशकों (retail investors) के पास हैं, जबकि प्रमोटरों की हिस्सेदारी सिर्फ 7.13% है। हाल के महीनों में बोर्ड में बड़े बदलाव, गवर्नेंस विवाद, निदेशकों का हटाया जाना और वित्तीय बयानों को अस्वीकार किया जाना जैसी घटनाएं सामने आई हैं। जनवरी 2026 में, फंड की हेराफेरी (fund diversions) की जांच के लिए फोरेंसिक और सेक्रेटरियल ऑडिटर नियुक्त किए गए थे। स्थिति तब और बिगड़ी जब 9 अप्रैल, 2026 को पूर्व निदेशकों के खिलाफ ₹1.78 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, और Raj Breeders and Hatcheries Private Limited ने इंसॉल्वेंसी याचिका दायर की है।
आगे क्या?
कंपनी दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत चल रही इंसॉल्वेंसी कार्यवाही का सामना कर रही है, जो इसके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है। ₹1.78 करोड़ की धोखाधड़ी की एफआईआर गंभीर गवर्नेंस खामियों की ओर इशारा करती है। शून्य रेवेन्यू और इंसॉल्वेंसी कार्यवाही कंपनी की अत्यधिक नाजुक वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं। शेयरधारकों की पिछली असहमति और मौजूदा कानूनी लड़ाइयां प्रबंधन में विश्वास की भारी कमी का संकेत देती हैं।
निवेशक अब Raj Breeders and Hatcheries Private Limited द्वारा दायर इंसॉल्वेंसी कार्यवाही के नतीजे पर और ₹1.78 करोड़ की धोखाधड़ी वाली एफआईआर से जुड़े घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखेंगे। यह देखना भी अहम होगा कि कंपनी SPVO के अधिग्रहण को कैसे सक्रिय करती है और अपने शून्य रेवेन्यू व वित्तीय संकट से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
