शेयरहोल्डर्स के वोट से तय होंगी कंपनी की दिशा
Skyline Ventures India Ltd अपने शेयरहोल्डर्स से नौ मुख्य प्रस्तावों पर पोस्टल बैलेट (postal ballot) के जरिए वोट करने का अनुरोध कर रही है। इनमें से सबसे अहम हैं SPVO Two Point O Ventures Tech Private Limited को कंपनी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी (wholly-owned subsidiary) बनाना। इसके अलावा, कंपनी अपनी कर्ज लेने की क्षमता को ₹23.97 करोड़ तक बढ़ाने और नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) निवेशकों के लिए शेयरहोल्डिंग की लिमिट को 24% तक ले जाने की भी मंजूरी चाहेगी।
अधिग्रहण के तहत, SPVO Two Point O Ventures Tech के लिए ₹1,00,000 की शुरुआती पेमेंट के साथ ₹3.97 करोड़ तक का अतिरिक्त निवेश करने का प्रस्ताव है। वहीं, प्रस्तावित अधिकतम बोरिंग लिमिट ₹23.97 करोड़ है, जबकि कंपनी ₹23.37 करोड़ तक के निवेश के लिए भी शेयरहोल्डर्स की हरी झंडी मांगेगी।
बोर्ड की ओर से दो इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (independent directors) की नियुक्ति, कंपनी की संपत्तियों (assets) को बेचने, नए निवेश करने और अगले पांच फाइनेंशियल ईयर (financial years) के लिए एक सेक्रेटेरियल ऑडिटर (secretarial auditor) की नियुक्ति पर भी वोटिंग होगी। कंपनी के मैनेजमेंट ने यह भी बताया है कि वे बोर्ड को कंपनी के कामकाज की जांच करने, कानूनी कार्रवाई शुरू करने और हुए नुकसान की रिकवरी (recovery) के लिए अधिकार देने का प्रस्ताव भी लाए हैं। इस कदम से कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) में सुधार और शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने पर जोर दिया जा रहा है, खासकर पिछली चुनौतियों को देखते हुए।
1988 में स्थापित Skyline Ventures India Ltd पहले भी कई ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दिक्कतों से गुजरी है, जैसे कि इनएक्टिव बैंक अकाउंट्स और रेगुलेटरी (regulatory) कंप्लायंस (compliance) की समस्याएं। हाल के वर्षों में बोर्ड में काफी बदलाव हुए हैं।
अगर शेयरहोल्डर्स इन प्रस्तावों को मंजूरी देते हैं, तो SPVO Two Point O Ventures Tech एक सब्सिडियरी बन जाएगी, जो कंपनी के ऑपरेशंस के लिए नया आधार प्रदान कर सकती है। बढ़ी हुई बोरिंग और निवेश की पावर कंपनी को अधिक फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी (financial flexibility) देगी, जिससे वह स्ट्रेटेजिक (strategic) फैसले ले सकेगी। एनआरआई निवेश की लिमिट बढ़ने से विदेशी पूंजी (foreign capital) को आकर्षित करने में भी मदद मिल सकती है।
इस वोटिंग की प्रक्रिया 30 मार्च से 28 अप्रैल, 2026 तक चलेगी, और नतीजों की घोषणा 30 अप्रैल, 2026 तक होने की उम्मीद है। कंपनी के भविष्य के लिए यह वोटिंग एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
