SEBI के 'Large Corporate' फ्रेमवर्क से Sigma Advanced Systems को राहत
SEBI के नियमों के तहत, 'Large Corporate' स्टेटस के लिए कंपनियों को कुछ खास फाइनेंशियल थ्रेशोल्ड (financial thresholds) पूरे करने होते हैं। इसमें ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक की लॉन्ग-टर्म बरोइंग (long-term borrowings) और मिनिमम 'AA' क्रेडिट रेटिंग शामिल है। इन मापदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों को अपने नए कर्ज का एक बड़ा हिस्सा, कम से कम 25%, पब्लिक बॉन्ड ऑफरिंग (public bond offerings) के जरिए ही जुटाना होता है।
Sigma Advanced Systems ने 29 अप्रैल, 2026 को जारी एक बयान में स्पष्ट किया है कि वे 31 मार्च, 2026 तक की अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर इस 'Large Corporate' क्राइटेरिया में नहीं आते हैं। यह राहत कंपनी को फंड जुटाने की प्रक्रिया में अधिक लचीलापन (flexibility) देगी, क्योंकि उन्हें SEBI के इन कड़े नियमों का पालन नहीं करना पड़ेगा।
कंपनी का नाम बदलना और सेक्टर में बदलाव
Sigma Advanced Systems ने जनवरी 2026 में अपना नाम Megasoft Limited से बदलकर किया था। कंपनी अब डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर पर ध्यान केंद्रित कर रही है, खासकर डिफेंस सिस्टम्स और सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के निर्माण में। SEBI ने अक्टूबर 2023 में 'Large Corporate' फ्रेमवर्क पेश किया था ताकि बड़ी कंपनियों को बॉन्ड मार्केट के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
Choice International और FDC Limited जैसी कुछ अन्य कंपनियों ने भी हाल ही में संकेत दिया है कि वे 31 मार्च, 2026 की अवधि के लिए 'Large Corporate' के दायरे में नहीं आती हैं। इसका मुख्य कारण अक्सर पर्याप्त बरोइंग या क्रेडिट रेटिंग का न होना होता है।
आगे क्या?
इस छूट के साथ, Sigma Advanced Systems को SEBI के उस नियम से आजादी मिलेगी, जिसमें 'Large Corporates' को अपने नए बरोइंग का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज (debt securities) के जरिए जुटाना अनिवार्य है। इससे कंपनी को अपने फाइनेंस को मैनेज करने और कैपिटल जुटाने के तरीकों में अधिक स्वायत्तता (autonomy) मिलेगी, बजाय इसके कि वे किसी खास डेट इश्यूअंस प्लान (debt issuance plan) में बंध जाएं।
