2013 के मामले में क्या है पूरा पेंच?
राजस्थान के अजमेर से मिली जानकारी के अनुसार, सुपरिंटेंडिंग माइनिंग इंजीनियर, ऑफिस ऑफ द माइनिंग इंजीनियर, डिपार्टमेंट ऑफ माइंस एंड जियोलॉजी, अजमेर सर्कल ने Shree Cement लिमिटेड को यह डिमांड ऑर्डर जारी किया है। यह पेनल्टी 2013 में कंपनी के शेओपुरा केसरपुरा माइंस (Sheopura Kesarpura Mines) में हुई कम्प्लायंस (Compliance) से जुड़ी देरी के मामले में लगाई गई है।
कंपनी ने साफ किया है कि इस ऑर्डर का उनके ऊपर कोई बड़ा फाइनेंशियल इम्पैक्ट (Financial Impact) नहीं होगा। Shree Cement इस फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देने की तैयारी में है।
हालांकि ₹68.56 लाख का यह जुर्माना कंपनी के आकार को देखते हुए बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन यह दर्शाता है कि पुराने कम्प्लायंस इश्यूज पर रेगुलेटरी स्क्रूटनी (Regulatory Scrutiny) जारी है। कंपनी का यह रुख बताता है कि वे जुर्माने के असर को मैनेज कर सकते हैं, पर इसे चुनौती देने का फैसला उनके हिसाब से विभाग के मूल्यांकन से असहमति दिखाता है।
हालिया रेगुलेटरी एक्शन का दौर
यह कोई पहला मौका नहीं है जब Shree Cement को किसी रेगुलेटरी एक्शन (Regulatory Action) का सामना करना पड़ा है। इससे पहले जनवरी 2026 में कंपनी को इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) के कथित उल्लंघन पर ₹70.29 लाख के GST डिमांड ऑर्डर मिले थे। वहीं, जनवरी 2024 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने ₹481 करोड़ का जुर्माना लगाया था। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (Competition Commission of India - CCI) ने भी एंटी-कम्पटीटिव (Anti-competitive) प्रैक्टिसेज के चलते ₹397.51 करोड़ का भारी जुर्माना ठोका था। इसके अलावा, 2023 के मध्य में IT रेड्स के बाद ₹23,000 करोड़ के टैक्स इवेजन (Tax Evasion) की खबरें भी आई थीं, जिसे कंपनी ने सूचना इकट्ठा करने के लिए सर्वे बताया था।
Shree Cement माइनिंग डिपार्टमेंट के इस डिमांड ऑर्डर के खिलाफ लीगल लड़ाई लड़ने का इरादा रखती है, वहीं यह भी मान रही है कि इस पेनल्टी से कोई बड़ा फाइनेंशियल या ऑपरेशनल डिस्टर्बेंस (Operational Disturbance) नहीं होगा। कंपनी का यह हालिया रेगुलेटरी इतिहास, जिसमें CCI और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जैसे बड़े नामों से भारी पेनल्टी शामिल है, कम्प्लायंस पर बढ़ती पैनी नजर को दिखाता है।
