SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' नियमों से कैसे बची Sangam Health Care?
Sangam Health Care Products Ltd. ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में यह पुष्टि की है कि वह SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के पैमाने पर फिट नहीं बैठती। कंपनी के मुताबिक, 31 मार्च, 2026 की स्थिति में उन पर शून्य (Zero) बकाया कर्ज (outstanding borrowing) था। यह स्टेटस मिलने का सीधा मतलब है कि कंपनी को डेट सिक्योरिटीज जारी करते समय LC कंपनियों के लिए लागू होने वाले कड़े डिस्क्लोजर और कंप्लायंस नियमों से छूट मिल गई है।
SEBI ने कॉर्पोरेट डेट मार्केट को बढ़ावा देने के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क पेश किया था। इसके तहत कुछ खास कंपनियों को ज़्यादा रिपोर्टिंग के साथ डेट के जरिए फंड जुटाना पड़ता है। Sangam Health Care जैसी कंपनियां, जो LC की सीमा से नीचे आती हैं, उन्हें फंड रेजिंग और डिस्क्लोजर के अलग और ज़्यादा लचीले नियम मिलते हैं।
1993 में स्थापित, Sangam Health Care Products Ltd. 'SAFTI' ब्रांड के तहत मेडिकल डिस्पोजेबल और सर्जिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। हालांकि, कंपनी को पिछले कुछ सालों में वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। फाइनेंशियल ईयर FY21 में कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। SEBI का 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क आम तौर पर बड़े लॉन्ग-टर्म बरोइंग वाले और अच्छी क्रेडिट रेटिंग (आमतौर पर 'AA' या उससे ऊपर) वाली कंपनियों को टारगेट करता है।
एक दिलचस्प तुलना यह भी है कि Sangam India Ltd. भी ₹52.23 करोड़ की ओपन चार्जेस के बावजूद LC स्टेटस से बाहर रही, क्योंकि उसकी क्रेडिट रेटिंग SEBI की 'AA' की ज़रूरी सीमा से नीचे थी। यह दर्शाता है कि सिर्फ कर्ज का आकार ही नहीं, बल्कि क्रेडिट क्वालिटी भी LC वर्गीकरण में अहम है।
हाल ही में, नवंबर 2024 में नॉन-कंप्लायंस के चलते Sangam Health Care को BSE से डीलिस्ट (delist) भी किया गया था, और अब कंपनी की रिलिस्टिंग (relisting) प्रक्रिया चल रही है।
इस 'लार्ज कॉर्पोरेट' स्टेटस से बाहर रहने का फायदा यह है कि कंपनी को डेट जारी करने और कंप्लायंस की प्रक्रिया में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) मिलेगी। वह LC फ्रेमवर्क के बाहर अन्य फंड रेजिंग विकल्पों को तलाश सकती है, जबकि उसे सामान्य रेगुलेटरी डिस्क्लोजर स्टैंडर्ड्स का पालन करना होगा।
स्टेकहोल्डर्स के लिए मुख्य चिंताएं अभी भी BSE डीलिस्टिंग के बाद की रिलिस्टिंग प्रक्रिया की प्रगति और कंपनी के पिछले फाइनेंशियल परफॉर्मेंस से जुड़ी रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी की कमजोरियां बनी हुई हैं। साथ ही, कंपनी पर जो ओपन चार्जेस हैं, उनकी स्थिति भी नज़र रखने लायक है।
