SEBI के नियमों का पालन करते हुए, Sai Life Sciences ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल, 2026 से उसके 'डेजिग्नेटेड एम्प्लॉइज' (designated employees) यानी कंपनी के खास कर्मचारी और उनके करीबी रिश्तेदार स्टॉक मार्केट में कंपनी के शेयर का लेन-देन (ट्रेडिंग) नहीं कर पाएंगे।
यह पाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कंपनी अपने चौथी तिमाही (Q4) और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के ऑडिटेड नतीजों की घोषणा नहीं कर देती, जिसका अंत 31 मार्च, 2026 को हो रहा है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना है, यानी कंपनी की गोपनीय जानकारी के आधार पर शेयरों की खरीद-बिक्री को रोकना।
SEBI के अनुसार, नतीजों की घोषणा सार्वजनिक रूप से हो जाने के 48 घंटे बाद ही ट्रेडिंग विंडो को फिर से खोला जाएगा।
Sai Life Sciences, जो कि एक इंटीग्रेटेड कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CRDMO) है, दुनिया भर की फार्मा और बायोटेक कंपनियों को अपनी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी हमेशा मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रेगुलेटरी नियमों के पालन पर ज़ोर देती रही है।
हालांकि यह एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन निवेशक अब कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर उत्सुक हैं। कंपनी की बोर्ड मीटिंग की तारीख, जिसमें इन नतीजों को मंजूरी दी जाएगी, अभी तय नहीं हुई है। इस तरह की ट्रेडिंग विंडो क्लोजर की प्रक्रिया फार्मा और लाइफ साइंस सेक्टर में काफी आम है। Syngene International और Piramal Pharma जैसी कंपनियां भी इसी फील्ड में हैं, जबकि Divi's Laboratories और Dr. Reddy's Laboratories जैसे बड़े नामों वाली कंपनियां भी इस तरह के रेगुलेटरी नियमों का पालन करती हैं।
