रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
कंपनी ने 15 मई, 2026 को अपनी मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट पेश की है, जो 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए है। इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि प्रिफरेंशियल इश्यू (preferential issue) के ज़रिए जुटाए गए ₹114.30 करोड़ का पूरा उपयोग हो चुका है।
फंड का मामूली फेरबदल और प्रोजेक्ट्स पर असर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ₹0.54 करोड़ के फंड का एक छोटा सा फेरबदल हुआ था, जिसे कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों (general corporate purposes) के बीच बांटा गया था। यह फेरबदल शेयरहोल्डर की मंजूरी वाली 10% सीमा के भीतर था और इसे ज्यादा बड़ा नहीं माना गया। सबसे अच्छी बात यह है कि जिन प्रोजेक्ट्स के लिए यह फंड जुटाया गया था, उनमें किसी भी तरह की देरी की रिपोर्ट नहीं की गई है।
यह फंड मार्च 2024 में वॉरंट इश्यू के ज़रिए जुटाया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य वर्किंग कैपिटल (working capital) और सामान्य कॉर्पोरेट खर्चों को पूरा करना था। फंड का पूरा इस्तेमाल हो जाने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है कि कंपनी अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे क्या?
हालांकि, ₹0.54 करोड़ का यह मामूली फेरबदल अभी स्वीकार्य है, लेकिन भविष्य में फंड के किसी भी बड़े हेरफेर पर निवेशकों की नज़र रहेगी। कंपनी केpeers जैसे Laurus Labs और Divi's Laboratories अक्सर अधिक जटिल काम करते हैं, वहीं SMS Pharma का ध्यान मुख्य APIs पर केंद्रित है, जो इसकी स्थिरता को सपोर्ट करता है। भविष्य की तिमाही नतीजों में इन फंड्स का असर रेवेन्यू और प्रॉफिट पर देखा जाएगा।