तिमाही नतीजों ने उड़ाए होश, कमाई शून्य पर
Reganto Enterprises ने 30 सितंबर 2025 को समाप्त हुई दूसरी तिमाही (Q2 FY26) के अपने नतीजे जारी किए हैं, जो बेहद निराशाजनक हैं। कंपनी ने इस तिमाही में ₹30.35 करोड़ का चौंकाने वाला शुद्ध नुकसान (Net Loss) दर्ज किया है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी की कुल आय (Total Income) घटकर शून्य हो गई, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह ₹35,945.68 लाख थी।
कंपनी के पिछले छह महीनों (30 सितंबर 2025 को समाप्त) के नतीजों पर नजर डालें तो कुल आय घटकर ₹7,703.61 लाख रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹35,946.85 लाख थी।
ऑडिट में बड़ा खुलासा, 'क्वालिफाइड ओपिनियन' जारी
इन खराब वित्तीय नतीजों के बीच, कंपनी के वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) ने एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) जारी किया है। यह गंभीर चेतावनी देता है कि कंपनी FEMA (Foreign Exchange Management Act) और RBI (Reserve Bank of India) के नियमों का पालन करने में गंभीर रूप से विफल रही है, खासकर एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट पेमेंट्स (निर्यात-आयात भुगतानों) के संबंध में। ऑडिटर की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी निर्धारित 6 महीने की अवधि के भीतर निर्यात आय वसूल करने और आयात भुगतान निपटाने में नाकाम रही।
इसके अलावा, ऑडिटर को कंपनी के प्रबंधन (Management) से इन लंबित मामलों पर किसी भी तरह का सबूत नहीं मिला, और न ही वे वेंडरों (Vendors) से बाहरी पुष्टि (External Confirmations) हासिल कर पाए। ये नतीजे 20 मार्च 2026 को बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए, जिससे रिपोर्टिंग में काफी देरी का संकेत मिलता है। 30 सितंबर 2025 तक, कंपनी पर ₹77,331.34 लाख की ट्रेड पेएबल्स (Trade Payables) यानी बकाया देनदारियां थीं।
इक्विटी में थोड़ी बढ़ोतरी
हालांकि, थोड़ी राहत की बात यह है कि 31 मार्च 2025 और 30 सितंबर 2025 के बीच कंपनी की कुल इक्विटी (Equity) ₹6,989.25 लाख से बढ़कर ₹9,349.04 लाख हो गई। यह बढ़ोतरी 4,68,66,660 वारंट्स (Warrants) को इक्विटी शेयरों में बदलने के कारण हुई है।
यह स्थिति क्यों गंभीर है?
एक तिमाही में कंपनी की कमाई का पूरी तरह शून्य हो जाना एक अत्यंत खतरनाक संकेत है, जो दर्शाता है कि कंपनी का मुख्य व्यवसाय लगभग ठप पड़ गया है। विदेशी मुद्रा नियमों और भुगतान प्रक्रियाओं में 'क्वालिफाइड ओपिनियन' का मतलब है कि कंपनी के परिचालन और नियामक अनुपालन (Compliance) में बड़ी समस्याएं हैं। ऑडिटर द्वारा सबूत न मिलने की बात कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाती है और इसकी 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी चलते रहने की क्षमता पर संदेह पैदा करती है।
कंपनी का इतिहास और आगे क्या देखें
Reganto Enterprises पहले Vintron Informatics Limited के नाम से जानी जाती थी और इलेक्ट्रॉनिक्स व सर्विलांस उत्पादों का व्यापार करती थी। कंपनी ने बाद में नाम बदला और EPC सेवाओं जैसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया। कंपनी पहले भी SEBI की कार्रवाई और जुर्माने का सामना कर चुकी है। ऐसे में, 'क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन' और कमाई का शून्य होना शेयरधारकों के लिए भारी अनिश्चितता लेकर आया है। निवेशकों को अब मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया, रेगुलेटरी निकायों (जैसे RBI, FEMA) की कार्रवाई और कंपनी की भविष्य की वित्तीय सेहत पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
