नई ऑडिट फर्म की नियुक्ति पर बोर्ड का फैसला
Raymond Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 5 मई, 2026 को हुई एक बैठक में Price Waterhouse Chartered Accountants LLP को कंपनी का नया स्टेट्यूटरी ऑडिटर नियुक्त करने पर मुहर लगा दी है। यह नियुक्ति 5 साल की अवधि के लिए होगी और इसे शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा, जो 101वें एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में वोट करेंगे।
यह नियुक्ति क्यों है अहम?
किसी भी कंपनी के लिए नए स्टेट्यूटरी ऑडिटर का चुनाव एक बड़ा कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) से जुड़ा फैसला होता है। यह कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करता है, जिससे शेयरधारकों और अन्य स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) का भरोसा बढ़ता है। Price Waterhouse Chartered Accountants LLP जैसी प्रतिष्ठित ऑडिट फर्म का चुनाव, Raymond की मजबूत वित्तीय निगरानी और नियमों के पालन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पुरानी ऑडिटर फर्म का कार्यकाल
कंपनी के जो पुराने ऑडिटर, M/s. Chaturvedi & Shah LLP, एक कैजुअल वैकेंसी (Casual Vacancy) को भरने के लिए नियुक्त किए गए थे, उनका कार्यकाल आगामी एजीएम में समाप्त हो रहा है।
आगे क्या होगा?
- शेयरधारक 101वें एजीएम में Price Waterhouse Chartered Accountants LLP की नियुक्ति पर अपना वोट देंगे।
- मंजूरी मिलने के बाद, नई ऑडिटर फर्म M/s. Chaturvedi & Shah LLP का स्थान ले लेगी और अपना ऑडिट कार्य शुरू करेगी।
- नई ऑडिट की जिम्मेदारी 5 साल की अवधि के लिए होगी।
गवर्नेंस के पहलू और पिछला रिकॉर्ड
हालांकि इस बार की फाइलिंग में ऑडिटर नियुक्ति से जुड़े किसी विशेष जोखिम का जिक्र नहीं है, लेकिन Raymond का अतीत में कुछ गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का सामना करना पड़ा है। SEBI ने 2019 में कंपनी पर संबंधित पार्टी लेनदेन (Related Party Transaction) के उल्लंघन के लिए ₹7 लाख का जुर्माना लगाया था। इसके अलावा, कुछ कॉर्पोरेट गवर्नेंस सलाहकार फर्मों ने कंपनी के अन्य मामलों, जैसे Gautam Singhania को Raymond Lifestyle का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने के प्रस्ताव पर पारदर्शिता और प्रतिष्ठा के जोखिमों को लेकर चिंता जताई थी। वहीं, नए ऑडिटर Price Waterhouse Chartered Accountants LLP के खिलाफ पिछले 24 महीनों में कोई प्रतिकूल नियामक कार्रवाई (Adverse Regulatory Action) दर्ज नहीं की गई है।
इंडस्ट्री में क्या है चलन?
नामचीन ऑडिट फर्मों को स्टेट्यूटरी ड्यूटीज के लिए नियुक्त करना इंडस्ट्री में एक आम बात है। Aditya Birla Fashion and Retail और Arvind Fashions जैसी कंपनियां भी प्रमुख ऑडिट फर्मों के साथ काम करती हैं, जो सामान्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों के अनुरूप है।
निवेशकों को इन बातों पर रखना होगा ध्यान
- 101वें एजीएम में शेयरधारकों के वोट का नतीजा।
- नए स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स के लिए आधिकारिक शुरुआत की तारीख और जिम्मेदारियों की पुष्टि।
- आने वाली फर्म के साथ ऑडिट कमेटी के काम पर भविष्य के अपडेट।
- नए ऑडिट ओवरसाइट के तहत कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और अनुपालन (Compliance) पर नजर रखना।
