Purple Finance ने अपने कर्ज ढांचे को पुनर्गठित (restructure) करते हुए अपने नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCD) के फेस वैल्यू में कमी का ऐलान किया है। यह कदम कंपनी की बैलेंस शीट को प्रभावित करेगा, हालांकि NCDs की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।
पेमेंट और मैच्योरिटी की तारीखें
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इंटरेस्ट (Interest) और रिडेम्पशन (Redemption) पेमेंट्स 12 मई, 2026 को किए जाएंगे। इसके लिए 27 अप्रैल, 2026 को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय की गई है। इन NCDs की फाइनल मैच्योरिटी (Maturity) डेट 12 जनवरी, 2028 है।
फेस वैल्यू घटाने का असर
फेस वैल्यू में कटौती को कंपनी एक डेट मैनेजमेंट (Debt Management) की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। इससे कंपनी अपने लेवरेज (Leverage) को कम कर सकती है, बिना कुल बकाया ऋण साधनों की राशि को बदले। यह कदम मौजूदा डेट कोवेनेंट्स (Debt Covenants) को प्रभावित कर सकता है और निवेशकों की कंपनी की वित्तीय प्रतिबद्धताओं को देखने के नजरिए को बदल सकता है।
कंपनी का बैकग्राउंड और हालिया प्रदर्शन
Purple Finance एक RBI-रजिस्टर्ड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है जो MSME लेंडिंग पर फोकस करती है। यह विशेष रूप से प्रॉपर्टी पर लोन (Loan Against Property) के जरिए सुरक्षित बिजनेस लोन देती है, जिसमें डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच (Digital-first Approach) अपनाया जाता है। कंपनी सक्रिय रूप से पूंजी जुटा रही है। फरवरी 2026 तक इक्विटी वारंट्स (Equity Warrants) के जरिए ₹69.30 करोड़ जुटाने की योजना है, और मार्च 2026 में ₹25 करोड़ तक के NCD इश्यू की मंजूरी भी दी है।
FY2026 की तीसरी तिमाही में, Purple Finance ने ₹1.22 लाख का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। साथ ही, पिछले कुछ समय से घाटे के बाद कंपनी की कुल आय (Total Income) में पिछले साल की तुलना में 255% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है, जो वित्तीय सुधार का संकेत है। सितंबर 2025 तक, कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग ₹163 करोड़ थी। नवंबर 2025 में इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) ने इसके डेट इंस्ट्रूमेंट्स को 'IND BBB-' / स्टेबल (Stable) रेटिंग दी थी।
संभावित जोखिम और चिंताएं
हालांकि हालिया वित्तीय सुधार हुए हैं, लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 10 सालों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए Purple Finance 'बिलो एवरेज क्वालिटी कंपनी' है। मुख्य चिंताओं में लगातार तीन सालों से कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) शामिल हैं। साथ ही, प्रोविजन्स और कंटींजेंसी (Provisions and Contingencies) में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रमोटर होल्डिंग (Promoter Holding) भी घटकर 24.5% रह गई है, और स्टॉक प्राइस का ट्रेंड 'वीक' (Weak) बताया जा रहा है।
इंडस्ट्री का संदर्भ और प्रतिस्पर्धी
Purple Finance प्रतिस्पर्धी MSME लेंडिंग सेक्टर में काम करती है, जहां इसका मुकाबला Five-Star Business Finance और SBFC Finance जैसी कंपनियों से है। बड़ी NBFCs जैसे Bajaj Finance और Shriram Finance, जिनकी मार्केट कैप (Market Cap) अधिक है और ऑपरेशन डायवर्सिफाइड हैं, वे भी इस सेक्टर का हिस्सा हैं। नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCD) इस सेक्टर में पूंजी जुटाने का एक आम साधन है; उदाहरण के लिए, Unifinz Capital और Capri Global Capital ने भी हाल ही में NCD जारी किए हैं। Purple Finance की NCD फेस वैल्यू कम करने की रणनीति इसी संदर्भ में एक विशेष डेट मैनेजमेंट रणनीति है।
मुख्य वित्तीय मेट्रिक्स
- सितंबर 2025 तक एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹163 करोड़ थी।
- इंडिया रेटिंग्स ने नवंबर 2025 में Purple Finance के NCDs और बैंक लोन फैसिलिटीज को 'IND BBB-' / स्टेबल क्रेडिट रेटिंग दी थी।
- Q3 FY2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹1.22 लाख रहा।
निवेशक इन बातों पर रखें नज़र
निवेशकों को 12 मई, 2026 को होने वाले इंटरेस्ट और रिडेम्पशन पेमेंट्स की समय पर और पूरी अदायगी पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, कंपनी द्वारा भविष्य में NCD रिडेम्पशन की किसी भी योजना और 12 जनवरी, 2028 की अंतिम मैच्योरिटी डेट तक इसकी प्रगति का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा। यह भी देखना होगा कि यह डेट रीस्ट्रक्चरिंग (Debt Restructuring) भविष्य में उधार लेने की लागत और निवेशकों की भावनाओं को कैसे प्रभावित करती है।
