Oxygenta Pharma का बड़ा कदम: 1 अप्रैल से बंद होगी ट्रेडिंग विंडो
Oxygenta Pharmaceutical ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि 1 अप्रैल, 2026 से कंपनी की ट्रेडिंग विंडो अस्थायी रूप से बंद रहेगी। यह पाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कंपनी 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे साल के ऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजों को सार्वजनिक नहीं कर देती। इस अवधि के 48 घंटे बाद ही ट्रेडिंग दोबारा शुरू हो पाएगी।
इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगाम
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई जानकारी के अनुसार, यह कदम SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत उठाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी के अंदरूनी लोगों, जैसे कि डायरेक्टर्स और प्रमुख कर्मचारियों को गैर-सार्वजनिक (non-public) जानकारी के आधार पर शेयर की खरीद-बिक्री करने से रोकना है। इस तरह के कदम से शेयर बाजार में निष्पक्षता बनी रहती है और निवेशकों के हितों की रक्षा होती है।
कंपनी की पिछली चुनौतियां
Oxygenta Pharmaceutical, जो पहले S S Organics Limited के नाम से जानी जाती थी, तेलंगाना में बल्क ड्रग्स और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) बनाती है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी ने 178.72% की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की थी, लेकिन इसके बावजूद कंपनी को लगातार चार तिमाहियों में नेट लॉस का सामना करना पड़ा है। अक्टूबर 2025 में, Vildagliptin और Lacosamide जैसी प्रमुख दवाओं के लिए इसका मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के उल्लंघन के कारण सात दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। फरवरी 2023 में, SEBI ने ARR Capital से मिले एक लोन से जुड़े रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन और डिस्क्लोजर के मामलों में कंपनी पर जुर्माना भी लगाया था। इन निरंतर नेट लॉस के चलते कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल बने हुए हैं।
कौन होंगे प्रभावित?
इस 'ब्लैकआउट पीरियड' के दौरान, Oxygenta Pharmaceutical के सभी डेजिग्नेटेड कर्मचारी और उनके करीबी रिश्तेदार कंपनी के शेयर्स का ट्रेड नहीं कर पाएंगे। यह नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा और नतीजों की घोषणा के 48 घंटे बाद तक मान्य रहेगा। इस अवधि में ट्रेडिंग करना SEBI के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
इंडस्ट्री की सामान्य प्रक्रिया
यह ध्यान देने वाली बात है कि शेयर बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह ट्रेडिंग विंडो बंद करने की प्रक्रिया कई बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियों, जैसे Sun Pharmaceutical Industries, Dr. Reddy's Laboratories, Divi's Laboratories, Torrent Pharmaceuticals और Zydus Lifesciences में भी अपनाई जाती है।
