रेगुलेटरी स्टेटस और गहरी वित्तीय मुश्किलें
Nutraplus India Ltd. ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को 23 अप्रैल, 2026 को दी गई जानकारी में साफ किया है कि वह 31 मार्च, 2026 तक SEBI द्वारा निर्धारित 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के मानकों को पूरा नहीं करेगी। SEBI का यह फ्रेमवर्क बड़ी कंपनियों के लिए डेट सिक्योरिटीज के जरिए कर्ज जुटाने के नियम तय करता है।
कर्ज जुटाने पर क्या होगा असर?
'लार्ज कॉर्पोरेट' कैटेगरी में न आने का मतलब है कि Nutraplus India को LC कंपनियों के लिए अनिवार्य डेट इश्यूएंस (borrowings through debt securities) के नियमों का पालन नहीं करना होगा। हालांकि, यह इस बात का भी संकेत है कि कंपनी खुद को इस दर्जे तक ले जाने के लिए आवश्यक वित्तीय मापदंडों पर खरी नहीं उतर रही है।
कंपनी की खराब आर्थिक हालत
1990 में स्थापित, Nutraplus India API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स) और स्पेशियलिटी केमिकल बनाने वाली कंपनी है। लेकिन इसका इतिहास गंभीर वित्तीय और रेगुलेटरी मुश्किलों से भरा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए कंपनी ने ₹5.01 लाख का नेट लॉस दर्ज किया है। ऑडिटर लगातार कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी, आगे भी व्यवसाय जारी रखने की क्षमता) पर संदेह जता रहे हैं। कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) पूरी तरह खत्म हो चुकी है, वर्किंग कैपिटल निगेटिव (Negative Working Capital) है और कर्ज डिफॉल्ट (Debt Defaults) के बड़े मामले हैं।
पुराने डिफॉल्ट और रेगुलेटरी मुद्दे
कंपनी पर पहले भी रेगुलेटरी कार्रवाई हुई है, जिसमें स्टॉक प्राइस मैनिपुलेशन (Stock Price Manipulation) के लिए SEBI का जुर्माना भी शामिल है। हाल ही में, सरस्वती बैंक (Saraswat Bank) से ₹76.24 करोड़ के लोन डिफॉल्ट के कारण कंपनी को अपनी संपत्तियां गंवानी पड़ीं। इसके अलावा, गवर्नेंस की भी कई कमियां सामने आई हैं, जैसे कि बोर्ड का ठीक से गठित न होना और प्रमुख स्टैचुटरी अधिकारियों की अनुपस्थिति।
मजबूत साथियों से तुलना
Nutraplus India, API और फार्मा सेक्टर में काम करती है। इसकी तुलना में Divis Laboratories Ltd. और Dr. Reddy's Laboratories Ltd. जैसी बड़ी कंपनियां आर्थिक रूप से बेहद मजबूत हैं और आसानी से 'लार्ज कॉर्पोरेट' के पैमाने पर फिट बैठती हैं। Ami Organics Ltd. जैसे छोटे प्लेयर भी आमतौर पर वित्तीय तौर पर बेहतर स्थिति में हैं।
प्रमुख जोखिम
Nutraplus India के लिए सबसे बड़ा जोखिम उसकी गंभीर वित्तीय संकट, लोन डिफॉल्ट, खत्म हो चुकी नेट वर्थ और गवर्नेंस की कमजोरियां हैं। रेगुलेटरी जांच का खतरा भी बना हुआ है।
वित्तीय स्थिति का स्नैपशॉट
31 मार्च, 2025 तक, कंपनी का संचित लॉस ₹62.57 करोड़ था। कंपनी फरवरी 18, 2020 तक सरस्वती बैंक के ₹76.24 करोड़ के लोन पर डिफॉल्ट कर चुकी थी।
