क्यों मिली ये छूट?
SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) LODR रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 15(2) के तहत, Northlink Fiscal को यह बड़ी राहत मिली है। कंपनी को यह एग्जेंप्शन (Exemption) इसलिए दी गई है क्योंकि 31 मार्च 2025 तक इसका पेड-अप कैपिटल ₹5.25 करोड़ और नेट वर्थ ₹5.04 करोड़ था। SEBI के नियमों के मुताबिक, जिन लिस्टेड कंपनियों का पेड-अप कैपिटल ₹10 करोड़ से ज्यादा न हो और नेट वर्थ ₹25 करोड़ से ज्यादा न हो, उन्हें इस रिपोर्ट से छूट मिल सकती है।
Northlink Fiscal, जो नवंबर 1994 में स्थापित हुई थी, शुरुआत में कंस्ट्रक्शन मटेरियल और सीमेंट ट्रेडिंग का काम करती थी। अब यह एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर लेंडिंग और फाइनेंसिंग गतिविधियों में लगी हुई है। कंपनी अप्रैल 2015 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट हुई थी।
इस छूट का मतलब है कि Northlink Fiscal को आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए रेगुलेटरी फाइलिंग का बोझ कम होगा, जिससे कंप्लायंस की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और एडमिनिस्ट्रेटिव लोड कम होगा। कंपनी की फाइलिंग में इस एग्जेंप्शन से जुड़े किसी खास जोखिम का जिक्र नहीं किया गया है।
SEBI का मकसद ऐसी छोटी लिस्टेड कंपनियों पर कंप्लायंस का बोझ कम करना है, और Northlink Fiscal के कैपिटल और नेट वर्थ के आंकड़े इस श्रेणी में आते हैं। निवेशकों को भविष्य में कंपनी के फाइनेंशियल ग्रोथ पर नज़र रखनी चाहिए, जो आने वाले सालों में कंपनी के कैपिटल या नेट वर्थ को एग्जेंप्शन लिमिट से ऊपर ले जा सकता है।
