हाई कोर्ट में दस्तक: ₹2.51 करोड़ के जीएसटी बिल का मामला
Nephrocare Health Services Ltd ने ₹2.51 करोड़ की गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिमांड के खिलाफ जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। इस भारी-भरकम डिमांड में ₹1.46 करोड़ का मूल टैक्स, ₹0.90 करोड़ का ब्याज और ₹0.15 करोड़ का जुर्माना शामिल है।
अपील खारिज, अब कोर्ट में दांव
कंपनी इस टैक्स डिमांड को गलत ठहरा रही है। मामला तब बिगड़ा जब एक पुराने टैक्स ऑर्डर के खिलाफ Nephrocare की अपील को जीएसटी अधिकारियों ने 'देरी' के आधार पर खारिज कर दिया। अब जब अपील रास्ते से हट गई, तो जीएसटी अथॉरिटीज ने कंपनी से यह रकम वसूलने की कार्यवाही शुरू कर दी है, जिसमें अटैचमेंट नोटिस भी भेजे गए हैं।
पूरा घटनाक्रम क्या है?
यह विवाद 18 सितंबर 2024 को आए एक 'शो कॉज नोटिस' से शुरू हुआ। इसके बाद 13 जनवरी 2025 को 'ऑर्डर-इन-ओरिजिनल' जारी हुआ। जब कंपनी ने इसके खिलाफ अपील की, तो वह 12 मार्च 2026 को 'देरी' के कारण खारिज हो गई, जिसके बाद कंपनी हाई कोर्ट पहुंची।
कंपनी की दलील और आगे क्या?
Nephrocare का मानना है कि यह डिमांड सही नहीं है और वे उम्मीद कर रहे हैं कि इस कानूनी लड़ाई का उन पर कोई खास वित्तीय असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अगर हाई कोर्ट का फैसला कंपनी के खिलाफ जाता है, तो उसे ₹2.51 करोड़ का भुगतान करना पड़ सकता है, जिसका असर कंपनी के मुनाफे और कैश फ्लो पर पड़ सकता है। शेयरहोल्डर्स इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
पुरानी दिक्कतें और कंपनी की पहचान
Nephrocare Health Services भारत और एशिया में डायलिसिस केयर की एक जानी-मानी प्रदाता है, जिसके 500 से ज्यादा क्लीनिक संचालित हैं। यह पहली बार नहीं है जब कंपनी को किसी नियामक पचड़े का सामना करना पड़ा हो। जनवरी 2014 में, दिल्ली सरकार ने Nephrocare और Max Healthcare Institute Ltd को कथित तौर पर बिड प्रक्रिया में गड़बड़ी के चलते एक साल के लिए सरकारी टेंडर्स से बाहर कर दिया था।
