रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा और रिवेन्यू
Mukesh Babu Financial Services Ltd. ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने कंसोलिडेटेड नतीजे जारी किए हैं। कंपनी की कुल आय (Total Income) पिछले साल के ₹837.76 लाख की तुलना में 187.19% बढ़कर ₹2,406.01 लाख (यानी ₹24.06 करोड़) हो गई। वहीं, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Net Profit After Tax) में तो जैसे तूफानी तेज़ी आई और यह पिछले साल के ₹51.18 लाख से 1200% से भी ज़्यादा बढ़कर ₹633.37 लाख (यानी ₹6.33 करोड़) पर पहुंच गया।
कंपनी का स्टैंडअलोन परफॉरमेंस भी दमदार रहा, जिसमें कुल आय 41.48% बढ़कर ₹1,273.10 लाख (₹12.73 करोड़) रही और नेट प्रॉफिट ₹397.22 लाख (₹3.97 करोड़) दर्ज किया गया।
निवेशकों के लिए अच्छी खबर: डिविडेंड का ऐलान
शेयरधारकों को सीधे फायदा पहुंचाते हुए, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹1.20 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है, जो कि 12% का पेआउट है। कंपनी की कंसोलिडेटेड नेट वर्थ ₹361.61 करोड़ पर स्वस्थ बनी हुई है और कंसोलिडेटेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) बढ़कर ₹9.09 हो गया है। ऑडिटर ने भी कंपनी के वित्तीय रिपोर्टिंग पर अपनी अनमॉडिफाइड ओपिनियन (Unmodified Opinion) दी है।
चिंता की लकीरें: 'Other Income' और बढ़ते खर्चे
हालांकि, इस ज़बरदस्त ग्रोथ के पीछे कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं जिन पर निवेशकों को पैनी नज़र रखनी होगी। कंसोलिडेटेड खर्चों (Consolidated Expenses) में भारी उछाल देखा गया है, जो पिछले साल के ₹616.47 लाख से बढ़कर ₹1,568.87 लाख हो गए। इसके अलावा, कंपनी की कंसोलिडेटेड आय में एक बड़ा हिस्सा 'Other Income' से आया है, जो पिछले साल के ₹120.64 लाख से बढ़कर ₹1,124.12 लाख हो गया। 'Other Income' पर यह निर्भरता ग्रोथ की स्थिरता पर सवाल खड़े करती है। कुल उधार (Total Borrowings) भी ₹4,022.77 लाख से बढ़कर ₹4,890.83 लाख (₹48.91 करोड़) हो गया है।
बाज़ार में क्या है स्थिति?
Larger NBFC peers जैसे Shriram Finance और Cholamandalam Investment आम तौर पर स्थिर, पर धीमी ग्रोथ दिखाते हैं। वहीं, Poonawalla Fincorp जैसे अन्य NBFCs भी अपने एसेट बुक को बढ़ा रहे हैं। लेकिन, Mukesh Babu Financial Services की ग्रोथ की रफ्तार और खासकर 'Other Income' पर निर्भरता इसे बाकियों से अलग बनाती है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक मैनेजमेंट से 'Other Income' की स्थिरता और इसके प्रॉफिट में योगदान पर स्पष्टीकरण की उम्मीद करेंगे। खर्चों और उधार के स्तर में भविष्य के ट्रेंड्स पर भी नज़र रहेगी। कंपनी के कोर लेंडिंग बिज़नेस में ग्रोथ लाने की कोई भी नई स्ट्रेटेजी और डिविडेंड पॉलिसी को बनाए रखने की क्षमता पर भी बारीकी से नज़र रखी जाएगी।
