कोर्ट का बड़ा एक्शन
अहमदाबाद की कमर्शियल कोर्ट ने 1 अप्रैल, 2026 को मेहता इंटीग्रेटेड फाइनेंस लिमिटेड (MIFL) के पक्ष में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इस आदेश के तहत, कंपनी के उन Debtor (कर्जदारों) के Shares को अटैच करने और फ्रीज करने को कहा गया है, जिन्होंने कंपनी को पैसा देना है।
इसका मतलब है कि Debtor अब इन Shares को बेच या ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे। साथ ही, इन Shares पर जो भी डिविडेंड (Dividend) जमा हुआ है, उसे भी फ्रीज कर दिया गया है। यह कानूनी कदम MIFL के लिए 2007 से चल रहे एक विवाद में अपनी देनदारी वसूलने के लिए उठाया गया है। कोर्ट का यह नोटिस 8 अप्रैल, 2026 को वापसी योग्य है, यानी इस तारीख तक इस पर आगे की कार्रवाई होगी।
रिकवरी के लिए बड़ा कदम
यह कोर्ट का आदेश MIFL के लिए बकाया वसूली के प्रयास में एक बड़ी सफलता है। Shares और डिविडेंड को फ्रीज करके, कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि Debtor अपना पैसा कहीं और इस्तेमाल न कर पाएं, इससे पहले कि MIFL अपने दावों को पूरा कर सके। यह दिखाता है कि कंपनी अपने पुराने विवादों को सुलझाने के लिए कानूनी रास्ते अपनाने में कितनी सक्रिय है।
कंपनी का फोकस और पिछली कार्रवाई
Mehta Integrated Finance Limited, जो 1985 में इनकॉर्पोरेट हुई थी, एक कैटेगिरी-I मर्चेंट बैंकर है जो कैपिटल मार्केट्स एडवाइजरी और कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग का काम करती है। कंपनी ने हाल ही में अपनी स्ट्रैटेजी बदली है और अब नए फंड देने के बजाय पुरानी बकाया रकम की रिकवरी पर ज्यादा ध्यान दे रही है। यह लीजिंग और हायर परचेज बिजनेस में नई फंडिंग बंद कर चुकी है।
यह कानूनी एक्शन कंपनी के व्यापक रिकवरी प्रयासों का हिस्सा है। MIFL ने पहले भी Ronak Prints Pvt. Ltd. और Radhe Estate Developers जैसी कंपनियों के खिलाफ कर्ज वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई की है, जिनके विवाद भी कई साल पुराने हैं। आपको याद दिला दें कि राधे एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ दिसंबर 2025 में एक अंतरिम एग्जीक्यूशन ऑर्डर भी मिला था, जिससे पता चलता है कि कंपनी लगातार कानूनी रास्ते तलाश रही है।
आगे क्या?
इस आदेश से MIFL के लिए रिकवरी की संभावना बढ़ गई है। अब Debtor के लिए अपने Shares को ट्रांसफर करना या उन पर कर्ज लेना मुश्किल हो जाएगा। कोर्ट के अगले कदम पर नजर रहेगी, खासकर 8 अप्रैल, 2026 को वापसी योग्य नोटिस की तारीख पर।
