क्यों हुआ इतना नुकसान?
MPM ने 31 दिसंबर, 2025 को खत्म हुई तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं। इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग इनकम (Operating Income) जहां ₹4.13 करोड़ रहा, वहीं कुल एक्सपेंसेस (Expenses) ₹24.59 करोड़ पर पहुंच गए। इसके चलते कंपनी को ₹20.46 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। प्रति शेयर आय (EPS) भी -₹1.72 रही, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
ऑपरेशनल समस्याएं और लीज की योजना
यह घाटा कंपनी की लंबे समय से चली आ रही ऑपरेशनल वायबिलिटी (operational viability) की समस्याओं को उजागर करता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, MPM अपनी मिल ऑपरेशन्स को किसी प्राइवेट एंटिटी को लीज पर देने की योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसे कंपनी को फिर से पटरी पर लाने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर ऑडिटर की राय का 'डिस्क्लेमर' (disclaimer of opinion) जैसी चिंताएं भी रही हैं, खासकर FY 2015-16 के लिए। MPM को 2011 में BIFR (Board for Industrial and Financial Reconstruction) में भेजा गया था। साल 2021 में मुख्य ऑपरेशन्स बंद होने के बाद भी, कंपनी ने सरकारी मदद से फॉरेस्ट्री प्लांटेशन पर ध्यान केंद्रित किया है। हालांकि, अप्रैल 2016 से मार्च 2025 तक के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (Financial Statements) अभी भी फाइनल नहीं हुए हैं, जो अकाउंटिंग जटिलताओं का संकेत देते हैं।
2017 से ही प्राइवेट पार्टनर की तलाश जारी है, लेकिन अब तक कई टेंडर्स के बावजूद कोई खरीदार नहीं मिला। इस प्रक्रिया को मैनेज करने के लिए iDeCK को ट्रांजेक्शन एडवाइजर (transaction advisor) नियुक्त किया गया है। लेबर यूनियंस की ओर से मिल बंद करने के आदेशों के खिलाफ दायर लीगल चैलेंजेस (legal challenges) भी एक अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। कंपनी का Altman Z-score -2.11 है, जो सॉल्वेंसी (solvency) के लिए हाई रिस्क बताता है।
आगे क्या?
निवेशक अब लीज प्लान की प्रगति, लेबर यूनियंस के लीगल चैलेंजेस और पेंडिंग फाइनेंशियल ऑडिट के पूरा होने पर नजर रखेंगे।
