ग्रोथ मार्केट्स में होटल चेन का विस्तार
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की जानी-मानी कंपनी Lemon Tree Hotels ने अपनी विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए दो नए होटलों का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़ के Raipur में 78-कमरे वाला Lemon Tree Premier और पंजाब के Jalandhar में 60-कमरे वाला Lemon Tree Hotel जल्द ही मेहमानों का स्वागत करेंगे। इन दोनों प्रोजेक्ट्स को कंपनी की सब्सिडियरी Carnation Hotels मैनेज करेगी, और इनसे कुल 138 कमरों का इजाफा होगा। यह कदम कंपनी को सेंट्रल और नॉर्थ इंडिया के प्रमुख ग्रोथ मार्केट्स में अपनी पहचान और मज़बूत करने में मदद करेगा।
एसेट-लाइट स्ट्रैटेजी पर कंपनी का फोकस
Lemon Tree Hotels अपनी ग्रोथ के लिए मुख्य रूप से एसेट-लाइट स्ट्रैटेजी पर भरोसा करती है, यानी कंपनी सीधे प्रॉपर्टी खरीदने के बजाय मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए विस्तार करना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाकर 269 होटल तक ले जाना है, जिसमें 131 ऑपरेशनल प्रॉपर्टीज़ और 138 होटल पाइपलाइन में होंगे। इसी फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने 56 नए होटल साइन किए और 20 होटल खोले भी हैं। कंपनी टियर II और टियर III शहरों के साथ-साथ इमर्जिंग लेज़र डेस्टिनेशंस पर भी फोकस कर रही है।
रेगुलेटरी चुनौतियाँ और रिस्क फैक्टर
Expansion की इस कहानी के बीच, Lemon Tree Hotels और इसकी सब्सिडियरीज़ को कुछ रेगुलेटरी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, सब्सिडियरी Fleur Hotels को ₹8.50 करोड़ से ज़्यादा की CGST डिमांड, टैक्स और पेनाल्टी के नोटिस मिले हैं। इसके अलावा, दूसरी सब्सिडियरीज़ को भी कंप्लायंस वायलेशन, ESI कंट्रीब्यूशन में देरी और एक्साइज लॉ के उल्लंघन के लिए पेनाल्टी भुगतनी पड़ी है। कंपनी का कहना है कि इन मुद्दों का उसके फाइनेंशियल ऑपरेशंस पर कोई बड़ा असर नहीं है और वह कानूनी रास्ते तलाश रही है, लेकिन इन रेगुलेटरी मामलों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
कॉम्पिटिशन और फ्यूचर आउटलुक
Lemon Tree Hotels का कॉम्पिटिशन Indian Hotels Company Ltd., EIH Ltd. (The Oberoi Group), Chalet Hotels Ltd. और मिड-प्राइस्ड सेगमेंट में Ginger Hotels जैसे बड़े नामों से है। इन सब के बीच, Lemon Tree Hotels अपनी आक्रामक एसेट-लाइट एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी से अपनी मौजूदगी तेज़ी से बढ़ा रही है। इन्वेस्टर्स अब इन नई प्रॉपर्टीज़ के कंस्ट्रक्शन और ऑपरेशनल परफॉरमेंस, जैसे ऑक्यूपेंसी रेट्स और एवरेज डेली रेट (ADR) पर बारीकी से नज़र रखेंगे।
