इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के लिए उठाया कदम
SEBI (प्रोहिबिशन ऑफ इनसाइडर ट्रेडिंग) रेगुलेशंस, 2015 के तहत, Landmark Global Learning Limited ने यह अहम फैसला लिया है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य अंदरूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल रोककर शेयर बाजार में निष्पक्षता बनाए रखना है। जब तक कंपनी के नतीजे जारी नहीं हो जाते, तब तक किसी भी अंदरूनी व्यक्ति को शेयर खरीदने या बेचने की इजाजत नहीं होगी।
कंपनी की पृष्ठभूमि और हालिया वित्तीय जानकारी
Landmark Global Learning Limited, जिसका नाम पहले 'Landmark Immigration Consultants Ltd.' था (और जून 2025 में यह नाम बदला गया), साल 2010 में स्थापित हुई थी। कंपनी मुख्य रूप से छात्रों को कनाडा में पढ़ाई के लिए मदद करती है। कंपनी ने जनवरी 2025 में ₹40.32 करोड़ का IPO लॉन्च किया था। प्रमोटर जसमीत सिंह भाटिया ने 26 दिसंबर, 2025 को 1,00,800 शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 65.16% कर ली थी।
फाइनेंशियल ईयर 2026 (31 मार्च, 2026 को समाप्त) के लिए, कंपनी ने लगभग ₹37.58 करोड़ का रेवेन्यू और ₹13.13 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया। पिछले फाइनेंशियल ईयर (31 मार्च, 2025 को समाप्त) में कंपनी का रेवेन्यू ₹39.91 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹13.13 करोड़ था।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि 2025 में कंपनी के वैधानिक ऑडिटर ने लिस्टेड स्टेटस के कारण बढ़ी हुई कंप्लायंस जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था।
निवेशकों पर असर और आगे क्या?
इस अवधि के दौरान, कंपनी के अंदरूनी लोग और उनके रिश्तेदार Landmark Global Learning के शेयर ट्रेड नहीं कर पाएंगे। अब सभी की निगाहें कंपनी के FY26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर टिकी रहेंगी, जिससे कंपनी के प्रदर्शन का पता चलेगा।