एनबीएफसी से एग्जिट, लॉयल्टी में जोर
LKP Finance Ltd. ने आखिरकार नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर अपनी भूमिका से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी के पंजीकरण को स्वेच्छा से रद्द करने की मंजूरी दे दी है। यह बदलाव 20 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा, जिसके बाद कंपनी पूरी तरह से अपने रिवॉर्ड्स और लॉयल्टी प्रोग्राम्स के बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करेगी।
क्या है खास?
कंपनी ने साफ कर दिया है कि एनबीएफसी के तौर पर काम बंद करने से उसके बिजनेस पर कोई खास नकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। यह कदम कंपनी के नियामक अनुपालन (regulatory compliance) को आसान बनाएगा और संसाधनों को रिवॉर्ड्स और लॉयल्टी प्रोग्राम्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाने में मदद करेगा, जो कस्टमर एंगेजमेंट और रिटेंशन के लिए बेहद जरूरी हैं।
पृष्ठभूमि
LKP Finance ने दरअसल अक्टूबर 2025 में ही अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) में बदलाव करके नए बिजनेस एरिया में विस्तार का संकेत दे दिया था। यह उस बड़े ट्रेंड का हिस्सा है जहां 2026 की शुरुआत से ही कई एनबीएफसी कंपनियां रणनीतिक पुनर्गठन (strategic realignment) के तहत अपने लाइसेंस सरेंडर कर रही हैं।
आगे क्या?
अब कंपनी का पूरा फोकस रिवॉर्ड्स और लॉयल्टी प्रोग्राम्स पर रहेगा। इसके लिए कंपनी को वित्तीय सेवाओं से हटकर टेक्नोलॉजी-फोक्स्ड लॉयल्टी प्लेटफॉर्म की ओर अपनी विशेषज्ञता और इंफ्रास्ट्रक्चर को ट्रांसफर करना होगा। निवेशकों की नजर अब कंपनी की विस्तार रणनीति, प्रदर्शन के मेट्रिक्स और नए फोकस एरिया में संभावित पार्टनरशिप पर रहेगी।
अहम तारीख
20 मार्च, 2026: LKP Finance Ltd. ने RBI के साथ अपना NBFC सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन स्वेच्छा से रद्द करवाया।
