NBFC से Exit की क्या है वजह?
यह फैसला 26 मार्च, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में लिया गया। इस बदलाव के तहत, कंपनी एनबीएफसी ऑपरेशंस से जुड़ाई गई सभी एक्टिविटीज को बंद कर देगी। इसमें अंडरराइटिंग, सिक्योरिटीज में निवेश, कंसल्टेंसी सर्विसेज, रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंसी का काम, और लीजिंग/हायर परचेज़ जैसी सेवाएं शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि यह कदम उसकी बदली हुई बिजनेस स्ट्रेटेजी के अनुरूप है।
शेयर होल्डर्स की मंजूरी जरूरी
इस बड़े स्ट्रेटेजिक शिफ्ट के लिए अब कंपनी को शेयर होल्डर्स की मंजूरी लेनी होगी। इसके लिए पोस्टल बैलेट के जरिए वोटिंग कराई जाएगी। अगर शेयर होल्डर्स सहमत होते हैं, तो कंपनी अपने MOA में जरूरी बदलाव करेगी और एनबीएफसी लाइसेंस को सरेंडर करने की दिशा में बढ़ सकती है। यह साल 2026 की शुरुआत से ही विचाराधीन था, जब बोर्ड ने MOA में बदलावों पर गौर किया था।
कंपनी का पिछला इतिहास और नई दिशा
LKP Finance साल 1984 से एनबीएफसी के तौर पर काम कर रही है। कंपनी फाइनेंस, शेयर्स और सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग, डेरिवेटिव्स, मर्चेंट फाइनेंसिंग, लीजिंग और हायर परचेज़ जैसे कामों में सक्रिय रही है। इस एग्जिट का मतलब है कि कंपनी अब इन पारंपरिक ऑपरेशंस से हटकर नए ग्रोथ एरियाज पर फोकस कर सकती है।
इंडस्ट्री में ट्रेंड
LKP Finance का यह कदम इंडस्ट्री में चल रहे एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। कई एनबीएफसी कंपनियां रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पास अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर कर रही हैं। Vigfin Holdings, Fino Finance और Reliance Commercial Finance जैसी कंपनियां भी एनबीएफसी बिज़नेस से बाहर निकल चुकी हैं या निकलने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, Bajaj Finance और Shriram Finance जैसी बड़ी कंपनियां अभी भी इस सेक्टर में मजबूत बनी हुई हैं।