SEBI के नियमों के अनुसार, Ishita Drugs & Industries Ltd. को एक बड़ी राहत मिली है। कंपनी को अब वित्तीय वर्ष 2026 तक के लिए एनुअल सीक्रेटरियल कंप्लायंस सर्टिफिकेट (Annual Secretarial Compliance Certificate) जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
यह राहत इसलिए संभव हुई है क्योंकि कंपनी का पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल ₹2.99 करोड़ और नेट वर्थ ₹10.79 करोड़ है, जो 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार SEBI द्वारा तय की गई ₹10 करोड़ और ₹25 करोड़ की न्यूनतम सीमा से काफी कम है। SEBI की लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशन्स, 2015 के तहत, यह प्रावधान छोटी कंपनियों के लिए कंप्लायंस के बोझ को कम करता है। इस छूट से Ishita Drugs को अपना ध्यान मुख्य बिजनेस ऑपरेशन्स और ग्रोथ पर केंद्रित करने का मौका मिलेगा, बजाय इसके कि वे अतिरिक्त नियामक फाइलिंग्स में संसाधन लगाएं।
1992 में स्थापित Ishita Drugs & Industries Ltd., एक्टिव फार्मा इंग्रीडिएंट्स (APIs), ड्रग इंटरमीडिएट्स और फाइन केमिकल्स के निर्माण में सक्रिय है। कंपनी ने हालिया फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹15.33 करोड़ का रेवेन्यू और ₹0.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। इसका तीन साल का औसत रिटर्न ऑन इक्विटी 8.40% रहा है।
इसके तुरंत बाद, कंपनी को 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए वार्षिक सीक्रेटरियल कंप्लायंस रिपोर्ट तैयार करने, फाइल करने या जमा करने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि वह अन्य सभी लागू SEBI और एक्सचेंज नियमों का पालन करती रहेगी।
यह कोई अनोखी घटना नहीं है; Tirupati Finlease Ltd. और Sarthak Global Limited जैसी अन्य छोटी लिस्टेड फर्में भी इसी तरह के कैपिटल और नेट वर्थ मानदंडों को पूरा करके एनुअल सीक्रेटरियल कंप्लायंस रिपोर्ट से छूट का लाभ उठा चुकी हैं।
निवेशक कंपनी के अन्य SEBI और एक्सचेंज नियमों के अनुपालन पर, साथ ही आगामी तिमाही के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य में किसी भी परिचालन विस्तार या रणनीतिक पहलों पर नजर रखेंगे।
