कर्ज के बोझ से राहत और नई पूंजी जुटाने की ओर Himalaya Food International
Himalaya Food International Ltd के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने हाल ही में हुई बैठक में कंपनी की वित्तीय सेहत को सुधारने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। सबसे अहम है बैंकों के साथ ₹43 करोड़ के 'वन-टाइम सेटलमेंट' (OTS) को अंतिम मंजूरी, जिसके तहत ₹21.50 करोड़ की राशि तुरंत जारी कर दी गई है।
प्रमुख फैसले और नई नियुक्तियां
7 अप्रैल 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में कंपनी ने ₹25 करोड़ तक का फंड जुटाने की भी योजना को हरी झंडी दिखा दी है। यह फंड जुटाना कर्ज को इक्विटी में बदलकर या फिर सीधे इक्विटी जारी करके किया जा सकता है। इसके अलावा, कंपनी ने M/s Kumar Rupak & Associates को अपना नया स्टेट्यूटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) नियुक्त किया है।
बोर्ड ने Simplot को मशीनरी वापस न करने को लेकर एक औपचारिक डिस्प्यूट नोटिस (Dispute Notice) जारी करने और इसके लिए एक एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने को भी मंजूरी दी है।
वित्तीय और कानूनी मोर्चे पर बड़े कदम
ये फैसले Himalaya Food International के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं, जो कंपनी पर लदे भारी कर्ज को कम करने और पूंजी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ₹43 करोड़ का OTS, जिसकी समय सीमा सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है, कंपनी की बैलेंस शीट पर जोखिम को काफी कम करेगा और भविष्य में विकास के रास्ते खोलेगा।
वहीं, ₹25 करोड़ का फंड जुटाने का मकसद कंपनी के ऑपरेशन्स और विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था करना है। नए ऑडिटर की नियुक्ति से वित्तीय अनुपालन और निगरानी को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, Simplot के साथ मशीनरी को लेकर फिर से गरमाया विवाद कानूनी और परिचालन संबंधी अनिश्चितता को भी बनाए रखता है।
कंपनी का पिछला वित्तीय और कानूनी इतिहास
Himalaya Food International पहले भी कर्ज समाधान का सहारा ले चुकी है, जिसमें ₹82.80 करोड़ का एक बड़ा OTS शामिल था। Simplot के साथ पुराना विवाद, जो सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) में मध्यस्थता तक पहुंचा था, कई देशों में अदालती कार्रवाई का कारण बना है। इन वित्तीय और कानूनी चुनौतियों का असर कंपनी के शेयर प्रदर्शन पर भी पड़ा है, जो 2026 की शुरुआत में अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
इन बदलावों का क्या होगा असर?
- कर्ज में कमी: ₹43 करोड़ का OTS, जो सितंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा, कंपनी के भारी-भरकम पुराने कर्ज को खत्म कर वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाएगा।
- पूंजी का प्रवाह: ₹25 करोड़ जुटाने की योजना से कंपनी को भविष्य के निवेश, वर्किंग कैपिटल प्रबंधन और विस्तार योजनाओं के लिए पैसा मिलेगा।
- गवर्नेंस में सुधार: नए ऑडिटर की नियुक्ति से वित्तीय निगरानी और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
- कानूनी मोर्चा: Simplot विवाद का घटनाक्रम आगे चलकर कंपनी के लिए अतिरिक्त देनदारी या परिचालन में बाधा का कारण बन सकता है।
- शेयरधारकों के लिए: बैलेंस शीट पर जोखिम कम होने और पूंजी आने की संभावना को सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है, बशर्ते कंपनी इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करे।
आगे क्या देखना होगा
- आगामी EGM में क्या फैसले लिए जाते हैं।
- ₹25 करोड़ जुटाने की प्रक्रिया कितनी सफल रहती है।
- Simplot विवाद में आगे क्या होता है।
- नए ऑडिटर की भविष्य की रिपोर्ट क्या कहती है।
- OTS का अंतिम ₹21.50 करोड़ का भुगतान सितंबर 2026 तक समय पर होता है या नहीं।
