कंपनी ने ₹300 करोड़ की सिक्योरड रिडीमेबल नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) का अलॉटमेंट फाइनल कर लिया है, जिन पर 7.7545% का कूपन रेट मिलेगा। ये NCDs 4 मई, 2029 को मैच्योर होंगे और इन पर कंपनी की रिसीवेबल्स (receivables) का फर्स्ट और एक्सक्लूसिव चार्ज होगा।
इस फंड जुटाने का मुख्य मकसद HDB Financial Services के फंडिंग बेस (funding base) को मजबूत करना है, जिससे लेंडिंग ऑपरेशंस (lending operations) और बिजनेस एक्सपेंशन (business expansion) के लिए जरूरी रिसोर्सेज मिल सकें। कंपनी इन NCDs को BSE होलसेल डेट मार्केट सेगमेंट पर लिस्ट करने की योजना बना रही है, जिससे निवेशकों के लिए लिक्विडिटी (liquidity) और ट्रांसपेरेंसी (transparency) बढ़ेगी।
HDFC Bank की सब्सिडियरी (subsidiary) होने के नाते, HDB Financial Services का डेट कैपिटल मार्केट (debt capital markets) से फंड जुटाने का एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। इससे पहले मार्च 2026 में मैच्योर होने वाले सिक्योरड NCDs के लिए कंपनी ने 7.60% कूपन रेट पर ₹175 करोड़ जुटाए थे। HDB Financial Services की क्रेडिट रेटिंग्स (credit ratings) काफी मजबूत हैं, जिसमें लॉन्ग-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स (long-term debt instruments) के लिए 'CARE AAA' और 'CRISIL AAA' शामिल हैं, जो HDFC Bank से मिले मजबूत सपोर्ट और कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (financial stability) को दर्शाते हैं।
हालांकि, AAA रेटिंग्स के हिसाब से कूपन रेट कॉम्पिटिटिव (competitive) है, लेकिन इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) में बढ़ोतरी से भविष्य में बॉरोइंग कॉस्ट (borrowing cost) बढ़ सकती है। HDB Financial Services को पहले भी रेगुलेटरी (regulatory) एक्शन का सामना करना पड़ा है। अक्टूबर 2025 में RBI ने KYC नॉर्म्स (KYC norms) के उल्लंघन के लिए ₹4.2 लाख का जुर्माना लगाया था। वहीं, जनवरी 2025 में SEBI ने शेयर्स इश्यू (share issuance) से जुड़े कंपनीज़ एक्ट (Companies Act) के कथित उल्लंघनों की भी जांच की थी, जो रेगुलेटरी कंप्लायंस (regulatory compliance) पर लगातार नजर रखने की जरूरत को दर्शाता है।
मार्केट की बात करें तो, Bajaj Finance और Tata Capital जैसे AAA रेटेड NBFCs ने हाल ही में 7.40% के आसपास कूपन रेट पर NCDs इश्यू किए हैं। HDB Financial Services की 7.7545% की पेशकश हाई-रेटेड इश्यूअर्स (highly-rated issuers) के लिए मार्केट रेट्स के अनुरूप ही है। 31 दिसंबर, 2025 तक HDBFS का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,14,577 करोड़ था, और यह 31 मार्च, 2025 तक बढ़कर ₹1,14,577 करोड़ हो गया। फाइनेंशियल ईयर 25 में कंपनी का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछले साल के 7.83% से घटकर 7.44% हो गया, जिसका कारण फंड की कॉस्ट (cost of funds) में मामूली बढ़ोतरी है।
निवेशकों की नजरें अब कंपनी द्वारा इन NCDs को BSE होलसेल डेट मार्केट पर लिस्ट करने पर होंगी। इसके अलावा, वे बैलेंस शीट ग्रोथ (balance sheet growth) को सपोर्ट करने के लिए HDB Financial Services की कैपिटल रेजिंग (capital raising) की रणनीति, एसेट क्वालिटी (asset quality), प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) और कॉस्ट ऑफ फंड्स (cost of funds) पर भी नजर रखेंगे।
