SEBI कंप्लायंस सर्टिफिकेट का मतलब है कि Gujarat Natural Resources ने शेयर ट्रांसफर (Share Transfer) की प्रक्रिया का SEBI (डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 के तहत सही ढंग से पालन किया है, जो डीमटेरियलाइजेशन (Dematerialisation) के लिए जरूरी है।
हालांकि, यह सर्टिफिकेट कुछ चिंताओं के बीच आया है। एक तरफ, इस सर्टिफिकेट को जारी करने वाली RTA, Purva Sharegistry, का SEBI से पुराना नाता रहा है, जहाँ उसे पहले भी नियमों के उल्लंघन के चलते चेताया गया था। वहीं दूसरी ओर, Gujarat Natural Resources खुद SEBI द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) के दायरे में है।
यह फोरेंसिक ऑडिट सितंबर 2025 में शुरू हुआ था और इसका मकसद फाइनेंशियल ईयर 2020-21 से 2022-23 तक के वित्तीय विवरणों (Financial Statements) की जांच करना है। खास तौर पर, इसमें वित्तीय खुलासों (Financial Disclosures) और व्यावसायिक लेनदेन (Business Transactions) पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
Purva Sharegistry (India) Private Limited के लिए यह कोई नई बात नहीं है। मार्च 2021 में SEBI ने Purva Sharegistry को एक महीने के लिए नए क्लाइंट्स लेने से रोक दिया था। उस समय निरीक्षणों में सिग्नेचर रिकॉर्ड्स अधूरे होने और ट्रांसफर व डीमटेरियलाइजेशन रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई थीं।
तो, इस तिमाही के लिए डीमटेरियलाइजेशन प्रक्रियाओं के संबंध में वर्तमान कंप्लायंस सर्टिफिकेट एक आधारभूत आश्वासन देता है। लेकिन, SEBI द्वारा कंपनी पर चल रहे फोरेंसिक ऑडिट के कारण निवेशकों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं। इसके अलावा, RTA के पिछले कंप्लायंस मुद्दों को देखते हुए भी निवेशक सतर्क रह सकते हैं।
Gujarat Natural Resources ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन सेक्टर में काम करती है।