प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए प्रमोटरों की बढ़ी हिस्सेदारी
Godavari Drugs Limited के कई प्रमोटरों ने 18 मार्च, 2026 को प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए 23,60,065 कन्वर्टिबल वारंट्स और 1,12,360 इक्विटी शेयर खरीदे। यह ट्रांजैक्शन BSE लिमिटेड को सेबी के सब्सटैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर्स (SAST) रेगुलेशंस, 2011 के तहत रिपोर्ट किया गया। इन शेयरों और वारंट्स की खरीद से कंपनी में कुल INR 283.638661 मिलियन की फंडिंग आई है। खरीदारी करने वालों में प्रियंका जाजू, मुकुंद काकानी, प्रशांत श्रीमाल, ईशिर जाजू, कमला जाजू, घनश्याम जाजू, मोहित जाजू, सुषमा काकानी, तनुश्री काकानी और अक्षैत काकानी शामिल हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
प्रमोटर शेयरहोल्डिंग में यह बढ़त कंपनी के भविष्य की संभावनाओं पर प्रमोटरों के बढ़ते भरोसे का संकेत है। इससे प्रमोटरों और अन्य शेयरहोल्डर्स के हितों में बेहतर तालमेल (alignment) देखने को मिल सकता है। यह कदम कंपनी की स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर प्रमोटरों का नियंत्रण भी बढ़ाता है।
कंपनी का बैकग्राउंड
Godavari Drugs Limited, जिसकी स्थापना 1987 में हुई थी, भारत की एक फार्मास्युटिकल कंपनी है जो APIs, ड्रग इंटरमीडिएट्स और फाइन केमिकल्स के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करती है। कंपनी को प्रमोटर घनश्याम जाजू और मुकुंद काकानी का दशकों का अनुभव मिला हुआ है। हाल ही में, 12 फरवरी, 2026 को हुई एक EGM में शेयरहोल्डर्स ने प्रेफरेंशियल बेसिस पर इक्विटी शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी करने के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दी थी। इससे पहले, जुलाई 2024 में भी एक EGM में 3,67,95,000 कन्वर्टिबल वारंट्स के अलॉटमेंट को मंजूरी मिली थी।
पिछली चुनौतियां
हालांकि, कंपनी को अतीत में कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। अगस्त 2020 में CARE रेटिंग्स ने जरूरी जानकारी न देने के कारण कंपनी की रेटिंग को 'इश्यूअर नॉन-कोऑपरेटिंग' स्टेटस के तहत रखा था। ज़्यादा हाल ही में, अक्टूबर 2024 में MarketsMOJO ने हाई डेट-टू-EBITDA रेश्यो और प्रमोटर स्टेक में पिछली गिरावट जैसी चिंताओं के कारण स्टॉक को 'होल्ड' पर डाउनग्रेड किया था।
प्रतिस्पर्धी कंपनियों से तुलना
Godavari Drugs फार्मास्युटिकल सेक्टर में API और इंटरमीडिएट मैन्युफैक्चरर के तौर पर काम करती है। इसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, डिवीज लेबोरेटरीज, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हैं।
आगे क्या देखें?
अब निवेशकों को भविष्य में शेयरहोल्डिंग पैटर्न में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए, ताकि वारंट्स के कन्वर्जन के बाद प्रमोटर हिस्सेदारी में हुई वास्तविक बढ़त का पता चल सके। कंपनी के रेवेन्यू, प्रॉफिटेबिलिटी और डेट लेवल्स पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि नए कैपिटल और प्रमोटर सपोर्ट का असर समझा जा सके। साथ ही, कंपनी मैनेजमेंट द्वारा की जाने वाली किसी भी नई स्ट्रेटेजिक घोषणाओं पर भी ध्यान देना होगा।
