Go Fashion Share Price: निवेशकों को बड़ा झटका! Q4 में मुनाफे में **60%** की भारी गिरावट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Go Fashion Share Price: निवेशकों को बड़ा झटका! Q4 में मुनाफे में **60%** की भारी गिरावट
Overview

Go Fashion (India) Ltd के शेयरधारकों के लिए Q4 FY26 के नतीजे मायूस करने वाले रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले **60%** से ज़्यादा घटकर **₹7.95 करोड़** पर आ गया। वहीं, कंपनी का कुल रेवेन्यू भी **3.3%** गिरकर **₹204.51 करोड़** दर्ज किया गया।

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पूरे साल के नतीजों पर भी पड़ा असर

पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की बात करें तो कंपनी का नेट प्रॉफिट 36.71% गिरकर ₹59.18 करोड़ रहा, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह ₹93.50 करोड़ था। कंपनी का एनुअल रेवेन्यू भी 1.10% घटकर ₹863.97 करोड़ पर आ गया। कंपनी के ऑडिटेड स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने वित्तीय नतीजों पर अनमॉडिफाइड ओपिनियन (unmodified opinion) दिया है।

खर्चों का बोझ और मार्जिन पर दबाव

कंपनी की घटी हुई प्रॉफिटेबिलिटी की मुख्य वजह खर्चों में हुई बढ़ोतरी है, खासकर कर्मचारी लाभ (employee benefits) के तहत लागत काफी बढ़ गई है। आय में मामूली कमी और खर्चों में बढ़ोतरी के इस अंतर ने कंपनी के मार्जिन को काफी दबाया है।

कंपनी के अन्य अपडेट्स: बायबैक, IT जांच और शेयरहोल्डर स्टेटस

कंपनी ने हाल ही में ₹64.99 करोड़ का अपना शेयर बायबैक (Share Buyback) प्रोग्राम फरवरी-मार्च 2026 में पूरा किया है, जिसमें 14 लाख से ज़्यादा शेयर वापस खरीदे गए। इसका मकसद शेयरधारकों को वैल्यू देना था।

इसके अलावा, Go Fashion कुछ अन्य मामलों से भी निपट रही है। अक्टूबर 2025 में कंपनी के परिसरों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने सर्च की थी। कंपनी ने पूरा सहयोग करने की बात कही है और कहा है कि इससे कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ा है और फिलहाल कोई बड़ा वित्तीय प्रभाव नहीं दिख रहा है।

वहीं, प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी छह संस्थाओं ने 'पब्लिक' शेयरहोल्डर स्टेटस के लिए री-क्लासिफिकेशन का अनुरोध किया है, जिस पर कंपनी का बोर्ड जल्द ही विचार करेगा। कंपनी ने यह भी कंफर्म किया है कि वह अपने डेट-फ्री स्टेटस के चलते FY26 के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' (Large Corporate) के तौर पर वर्गीकृत नहीं होगी।

आगे की राह और जोखिम

आगे चलकर, कंपनी के लिए खर्चों को प्रभावी ढंग से मैनेज करना और सेल्स ग्रोथ को बढ़ाना अहम होगा। बायबैक से शेयरधारकों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन असली चुनौती लाभप्रदता (profitability) को वापस पटरी पर लाना है। निवेशक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच से जुड़े खुलासों पर भी बारीकी से नज़र रखेंगे।

उच्च ऑपरेटिंग खर्चों, विशेष रूप से कर्मचारी लाभों के कारण नेट प्रॉफिट मार्जिन पर बना दबाव एक चिंता का विषय है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच के संभावित प्रतिकूल निष्कर्ष भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। प्रतिस्पर्धी परिधान बाज़ार में बिक्री वृद्धि चलाने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.