क्यों बंद हो रही है ट्रेडिंग विंडो?
Decipher Labs ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया है कि यह 'क्लोजर पीरियड' कंपनी के डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और अन्य 'डेजिग्नेटेड पर्सन्स' पर लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अंदरूनी (insider) या गैर-सार्वजनिक (non-public) जानकारी का इस्तेमाल शेयर की खरीद-बिक्री में न हो सके, खासकर जब कंपनी अपने वित्तीय नतीजे जारी करने वाली हो।
SEBI का पुराना पेंच और अपील
यह ध्यान देने वाली बात है कि Decipher Labs और इसके प्रमुख लोग पहले भी SEBI के रडार पर रहे हैं। अगस्त 2025 में, SEBI ने Decipher Labs, प्रमोटर Janakiram Ajjarapu और डायरेक्टर Sushant Mohan Lal पर गलत जानकारी देने और 2021 के अंत से 2022 की शुरुआत तक इनसाइडर ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के आरोप में जुर्माना लगाया था। कंपनी और उसके डायरेक्टर्स ने इस SEBI ऑर्डर के खिलाफ सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में अपील दायर की है। SAT ने फिलहाल ट्रेडिंग बैन और जुर्माने पर रोक लगा दी है, बशर्ते कंपनी 50% राशि जमा करे, जब तक कि अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है?
अपने मौजूदा और पिछले रेगुलेटरी मामलों के बावजूद, 1 अप्रैल से शुरू हो रहा ट्रेडिंग विंडो क्लोजर एक रूटीन कंप्लायंस (routine compliance) एक्शन है। फार्मा सेक्टर की कई कंपनियां, जैसे Glenmark Pharmaceuticals, Hikal, और Zenith Healthcare भी अपने तिमाही और सालाना नतीजों की घोषणा से पहले इसी तरह की ट्रेडिंग विंडो क्लोजर प्रैक्टिस अपनाती हैं। यह SEBI द्वारा अनिवार्य एक स्टैंडर्ड प्रोसीजर है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
इस क्लोजर पीरियड के दौरान, कंपनी के वे सभी कर्मचारी और उनसे जुड़े व्यक्ति जो 'डेजिग्नेटेड पर्सन्स' की श्रेणी में आते हैं, Decipher Labs के शेयरों में ट्रेड नहीं कर पाएंगे। यह नियम तब तक लागू रहेगा जब तक कंपनी अपने FY26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी नहीं कर देती और उसके 48 घंटे बीत नहीं जाते। यह कदम शेयर बाजार की इंटीग्रिटी (integrity) बनाए रखने और सभी निवेशकों के लिए एक समान सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
