Crisil Limited: ₹121 करोड़ टैक्स डिमांड के खिलाफ कंपनी की बड़ी चाल! करने जा रही है अपील

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Crisil Limited: ₹121 करोड़ टैक्स डिमांड के खिलाफ कंपनी की बड़ी चाल! करने जा रही है अपील
Overview

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Crisil Limited को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से **₹121.20 करोड़** का टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। यह नोटिस फाइनेंशियल ईयर 2016-17 के लिए जारी किया गया है। कंपनी ने कहा है कि इस आर्डर का तुरंत कोई वित्तीय या ऑपरेशनल असर नहीं होगा और वह इसके खिलाफ अपील करेगी।

Crisil पर ₹121 करोड़ टैक्स का बड़ा झटका

क्रेडिट रेटिंग देने वाली कंपनी Crisil Limited को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से ₹121.20 करोड़ का टैक्स डिमांड आर्डर मिला है। यह नोटिस फाइनेंशियल ईयर 2016-17 (असेसमेंट ईयर 2017-18) से जुड़ा है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस आर्डर का उसके कामकाज या फाइनेंस पर फिलहाल कोई तत्काल असर नहीं पड़ेगा।

टैक्स डिमांड की वजह और कंपनी का जवाब

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने यह डिमांड गणना (computation) में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए जारी की है। डिपार्टमेंट ने यह भी कहा है कि इस दौरान कोई भी आय असेसमेंट से छूटी नहीं है। Crisil Limited इस नोटिस को स्वीकार नहीं कर रही है और इसके खिलाफ अपील करने की योजना बना रही है।

क्या Crisil करेगी अपील?

Crisil Limited इस टैक्स डिमांड को चुनौती देने के लिए तैयार है। कंपनी पहले इस मामले में रेक्टिफिकेशन एप्लीकेशन (Rectification Application) फाइल करेगी और उसके बाद ₹121.20 करोड़ की इस डिमांड के खिलाफ एक औपचारिक अपील दायर करेगी।

Crisil का बैकग्राउंड और पिछला इतिहास

Crisil की स्थापना साल 1987 में हुई थी और यह भारत की पहली क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। यह S&P Global की सब्सिडियरी है। कंपनी रेटिंग, रिसर्च और एडवाइजरी सेवाएं प्रदान करती है। यह पहली बार नहीं है जब Crisil को टैक्स संबंधी किसी मुद्दे का सामना करना पड़ा है। कंपनी पहले भी जीएसटी पेनल्टी और टीडीएस (TDS) प्रोसीडिंग्स जैसे मामलों में शामिल रही है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

भले ही Crisil ने कहा है कि इस टैक्स डिमांड का तत्काल कोई असर नहीं होगा, लेकिन इतने बड़े अमाउंट की डिमांड पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। अपील की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और यदि फैसला Crisil के पक्ष में नहीं आता है, तो यह कंपनी पर बड़ा वित्तीय बोझ डाल सकता है। शेयरहोल्डर्स को कंपनी द्वारा अपील प्रक्रिया पर दी जाने वाली अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए।

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