Dehradun प्लांट में क्या बदला?
कंपनी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। Coral Laboratories ने अपने Dehradun स्थित फार्मास्युटिकल प्लांट में Ointment (मलहम) बनाने वाली यूनिट का विस्तार पूरा कर लिया है। इसके बाद प्लांट की सालाना प्रोडक्शन कैपेसिटी अब बढ़कर 360,000 किलोग्राम हो गई है।
क्यों किया ये विस्तार?
इस विस्तार का मुख्य मकसद Coral Laboratories के Ointment प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को पूरा करना है, चाहे वह घरेलू बाजार हो या अंतरराष्ट्रीय बाजार।
कितना हुआ निवेश?
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 13 अक्टूबर, 2025 को इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इस विस्तार के लिए लगभग ₹30 करोड़ का निवेश किया गया है। इस फंड की व्यवस्था बैंक ओवरड्राफ्ट और कंपनी की अपनी बचत (internal accruals) से की गई है, ताकि Ointment बनाने की क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य पूरा हो सके।
निवेशकों की नजर
अब जब कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू हो गए हैं, Coral Laboratories अपनी बढ़ी हुई मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे सेल्स वॉल्यूम बढ़ेगा, मार्केट शेयर मजबूत होगा और Ointment प्रोडक्ट्स से रेवेन्यू में भी इजाफा होगा। निवेशक इस अपग्रेडेड यूनिट के सेल्स परफॉरमेंस पर बारीकी से नजर रखेंगे।
एक और डेवलपमेंट: BSE का जुर्माना
यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि Coral Laboratories को दिसंबर 2024 में BSE को ₹45,000 का जुर्माना भरना पड़ा था। यह जुर्माना उनके फाइनेंशियल रिजल्ट्स सबमिट करने में देरी के कारण लगा था। कंपनी को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि यदि वे फाइनेंशियल रिपोर्टिंग की समय-सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो उनके शेयर्स की ट्रेडिंग सस्पेंशन हो सकती है।
प्रतिस्पर्धी माहौल
Coral Laboratories भारतीय फार्मास्युटिकल सेक्टर में काम करती है, जो काफी प्रतिस्पर्धी है। कंपनी को Sun Pharmaceutical Industries, Dr. Reddy's Laboratories, Cipla, Aarti Drugs, Divi's Laboratories, और Laurus Labs जैसे बड़े खिलाड़ियों से टक्कर लेनी पड़ती है, जिनमें से कई ग्लोबल स्तर पर काम करते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
इस विस्तार से जुड़ी मुख्य बातें 360,000 Kgs की नई सालाना कैपेसिटी और ₹30 करोड़ का निवेश हैं। कंपनी की मार्केट शेयर में बढ़ोतरी और मांग को पूरा करने की क्षमता उसके भविष्य के विकास को दर्शाएगी।
