मैनेजमेंट में बड़ा फैसला: CFO का कार्यकाल बढ़ा, नए VP की नियुक्ति
Britannia Industries के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के टॉप फाइनेंसियल लीडरशिप में स्थिरता बनाए रखने के लिए अहम फैसले लिए हैं। बोर्ड ने N. Venkataraman को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के तौर पर एक और चार साल के लिए री-अपॉइंट करने की मंजूरी दे दी है। उनका नया कार्यकाल 30 जुलाई, 2026 से शुरू होगा।
राममूर्ति जयरामन बने नए VP
इसी के साथ, Ramamurthy Jayaraman को वाइस प्रेसिडेंट – कॉर्पोरेट फाइनेंस के पद पर प्रमोट किया गया है। यह नई भूमिका उन्हें 1 अप्रैल, 2026 से सौंपी जाएगी। इन नियुक्तियों से कंपनी की वित्तीय टीम को और मजबूती मिलेगी।
स्थिरता का संकेत
Britannia जैसी बड़ी FMCG कंपनी के लिए, फाइनेंसियल मैनेजमेंट में लगातार अनुभव का होना बेहद ज़रूरी है। Venkataraman, जो 2007 में कंपनी से जुड़े थे और तब से CFO की भूमिका निभा रहे हैं, अपने गहरे अनुभव से कंपनी की वित्तीय रणनीति और संचालन को दिशा देते रहेंगे। Jayaraman का प्रमोशन, कंपनी के भीतर ही सीनियर फाइनेंसियल टैलेंट को विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
पिछली कुछ बड़ी नियुक्तियाँ और वित्तीय आंकड़े
यह कदम ऐसे समय में आया है जब पिछले साल ही MD & CEO Varun Berry की जगह Rakshit Hargave ने यह पद संभाला था, और उस दौरान Venkataraman ने कुछ समय के लिए इंटेरिम CEO की भूमिका भी निभाई थी।
कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस की बात करें तो, Financial Year 2024-25 के लिए Britannia Industries ने ₹17,295.92 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स और ₹2,130.72 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों की नजरें अब शेयरधारकों से Venkataraman की पुनर्नियुक्ति के लिए मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पर होंगी। साथ ही, नए VP Corporate Finance, Jayaraman, की भूमिका कंपनी के फाइनेंसियल प्लानिंग और एनालिसिस को कैसे बेहतर बनाती है, इस पर भी गौर किया जाएगा। CFO के अनुभव को देखते हुए, कंपनी की वित्तीय रणनीति में स्थिरता बने रहने की उम्मीद है।
संभावित चुनौतियां
सबसे बड़ी चुनौती शेयरधारकों से Venkataraman के चार साल के कार्यकाल के लिए आवश्यक मंजूरी प्राप्त करना है। यदि यह मंजूरी नहीं मिलती है, तो इससे कुछ अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
इंडस्ट्री में क्या हो रहा है?
FMCG सेक्टर में Britannia के प्रतिद्वंद्वी जैसे Hindustan Unilever और ITC भी अपने लीडरशिप में स्थिरता और मजबूत फाइनेंस टीम पर जोर देते हैं। मैनेजमेंट में स्थिरता निवेशकों द्वारा सकारात्मक रूप से देखी जाती है।
