सब्सिडियरी की बड़ी सफलताएं
Bharat Parenterals की अहम सब्सिडियरी Innoxel Lifesciences को USFDA (अमेरिकन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) से EIR (Establishment Inspection Report) और EU-GMP (यूरोपियन गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी के लिए अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख रेगुलेटेड मार्केट्स के दरवाजे खुल गए हैं। यह कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है। इसके अलावा, एक और सब्सिडियरी Varenyam Healthcare भी प्रॉफिट में लौट आई है, जिससे ग्रुप की ओवरऑल फाइनेंशियल हेल्थ बेहतर हुई है।
शेयरधारकों को ₹1 का डिविडेंड
कंपनी के शानदार परफॉरमेंस और आगे की ग्रोथ की उम्मीदों को देखते हुए, बोर्ड ने ₹1.00 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी के ऑडिटर (Auditors) ने भी फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर अपनी 'अनमॉडिफाइड ओपिनियन' (Unmodified Opinion) दी है, जो कि कंपनी के अकाउंट्स की मजबूती को दर्शाता है।
रणनीतिक विस्तार और भविष्य की योजनाएं
Bharat Parenterals भविष्य में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और सब्सिडियरी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approvals) हासिल करने पर ज़ोर दे रही है। यह रणनीति कंपनी को US और यूरोप जैसे विकसित बाज़ारों में अपनी पहचान बनाने में मदद करेगी। कंपनी ने प्लांट्स में नई मशीनों और सुविधाओं में भी निवेश किया है।
FY27 को कंपनी के लिए कमर्शियल ग्रोथ का एक अहम साल माना जा रहा है। Innoxel Lifesciences से पहली कमर्शियल सप्लाई Q2 FY27 में शुरू होने की उम्मीद है। Innoxel का लक्ष्य FY27 में 10 नई फाइलिंग और 20 नए डील्स हासिल करना है। Bharat Parenterals के अकेले बिज़नेस के पास ₹171 करोड़ का ऑर्डर बुक है, जो भविष्य की कमाई का संकेत देता है।
संभावित जोखिम (Potential Risks)
हालांकि, कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। तेल उत्पादक क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव इनपुट लागत और शिपिंग को प्रभावित कर सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से इंपोर्टेड API की लागत बढ़ सकती है। अमेरिकी सरकार के शटडाउन से USFDA अप्रूवल में देरी हो सकती है।