Beryl Securities Limited ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को सूचित किया है कि वह फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 के लिए SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के कुछ नियमों से छूट (exemption) का दावा करना चाहती है।
SEBI के इन नियमों का Regulation 15(2) उन कंपनियों को कुछ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कंप्लायंस की जिम्मेदारियों से छूट देता है, जिनका वित्तीय पैमाना छोटा होता है। इसका मकसद लिस्टेड छोटी कंपनियों पर रेगुलेटरी बोझ कम करना है। आमतौर पर, यह छूट उन कंपनियों के लिए होती है जिनका पेड-अप कैपिटल ₹10 करोड़ से अधिक न हो और नेट वर्थ ₹25 करोड़ से अधिक न हो।
कंपनी ने 31 मार्च 2026 तक के अपने ₹4.85 करोड़ के पेड-अप कैपिटल का हवाला दिया है। वहीं, 31 मार्च 2025 तक कंपनी की नेट वर्थ ₹99.74 करोड़ बताई गई है।
यह नेट वर्थ ₹99.74 करोड़ छूट के लिए जरूरी ₹25 करोड़ की सीमा से कहीं ज्यादा है। यह विसंगति (discrepancy) कंपनी के दावे की वैधता पर सवाल खड़े करती है और रेगुलेटरी जांच (scrutiny) का कारण बन सकती है।
अगर रेगुलेटर इस छूट को मंजूरी देते हैं, तो Beryl Securities को लिस्टेड कंपनियों पर लागू होने वाले कुछ खास गवर्नेंस नियमों का पालन करने से राहत मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि छूट से इनकार किया जाता है, तो कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 के लिए सभी SEBI (LODR) Regulations का पूरी तरह से पालन करना होगा।
आगे इस मामले में BSE की ओर से छूट की अर्जी पर औपचारिक जवाब, नेट वर्थ के आंकड़ों को लेकर Beryl Securities की ओर से दी जाने वाली कोई भी स्पष्टीकरण, और दावे की पात्रता को लेकर SEBI की ओर से की जाने वाली संभावित कार्रवाइयों या सवालों पर नजर रखनी होगी।
