Anand Rathi Wealth Limited ने 10 अप्रैल 2026 को ₹1,00,000 करोड़ का AUM (Assets Under Management) पार करने के साथ एक अहम मुकाम हासिल किया है। यह कंपनी की ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो बाजार में इसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
कंपनी का विस्तार और ग्लोबल प्रेजेंस
कंपनी भारत के 18 शहरों में अपनी सेवाएं दे रही है और दुबई में भी इसकी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी है। खास बात यह है कि इसके यूके स्थित एंटिटी, Anand Rathi Wealth (UK) Ltd, को हाल ही में फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी (FCA) से पूरी ऑथराइजेशन मिल गई है। यह कदम ग्लोबल मार्केट में कंपनी के विस्तार की रणनीति का अहम हिस्सा है।
इस माइलस्टोन का महत्व
₹1 लाख करोड़ AUM का आंकड़ा पार करना क्लाइंट्स के बढ़ते भरोसे और बाजार में कंपनी की क्षमताओं पर विश्वास को दर्शाता है। यह इसे भारत की अग्रणी वेल्थ मैनेजमेंट फर्मों में एक खास जगह दिलाता है और भविष्य की ग्रोथ के लिए नए रास्ते खोलता है।
ऐतिहासिक ग्रोथ
यह कोई अचानक हासिल की गई उपलब्धि नहीं है। आनंद राठी वेल्थ का AUM 2015 में सिर्फ ₹5,624 करोड़ था, जो बढ़कर Q3 FY26 तक ₹99,008 करोड़ हो गया था। यह लगातार विस्तार और बाजार की उठापटक के बीच भी ग्रोथ की कहानी कहता है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (FY26)
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजों की बात करें तो, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹1,198.5 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट (PAT) ₹385.7 करोड़ दर्ज किया गया।
रेगुलेटरी माहौल और जोखिम
यह भी ध्यान देने योग्य है कि आनंद राठी ग्रुप की एक संबंधित कंपनी, Anand Rathi Share and Stock Brokers को मार्च 2026 में साइबर सिक्योरिटी और कंप्लायंस के उल्लंघन के मामले में SEBI से ₹10 लाख का जुर्माना भरना पड़ा था। हालांकि, यह ब्रोकरेज आर्म से जुड़ा मामला है, लेकिन यह ग्रुप के लिए नियामक वातावरण की ओर इशारा करता है। कंपनी के भविष्य के अनुमानों में कुछ जोखिम और अनिश्चितताएं शामिल हैं।
इंडस्ट्री में बाकी प्लेयर्स
इंडस्ट्री की बात करें तो, ICICI Securities का लक्ष्य FY25 तक ₹10 लाख करोड़ AUM हासिल करना है, वहीं HDFC Securities ने जनवरी 2025 तक ₹25,000 करोड़ का म्यूचुअल फंड AUM पार किया। 360 ONE WAM Ltd का Q3 FY26 में टोटल ARR AUM INR 3,17,906 करोड़ था, जो साल-दर-साल 28% की ग्रोथ दिखाता है।
आगे क्या?
निवेशकों की नजर अब ₹1 लाख करोड़ के पार AUM की लगातार बढ़त पर रहेगी। यूके और दुबई में कंपनी के प्रदर्शन और रेग्युलेटरी कंप्लायंस पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, क्लाइंट्स को बनाए रखने और नए क्लाइंट्स जोड़ने की रणनीतियां कंपनी के भविष्य की ग्रोथ को आकार देंगी।