डेट के जरिए जुटाए ₹10 करोड़
Anand Rathi Share and Stock Brokers Limited ने ₹10 करोड़ के सिक्योर, अनलिस्टेड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी करके फंड जुटाया है। यह प्राइवेट प्लेसमेंट 31 मार्च 2026 को पूरा हुआ, जिसमें 9.5% सालाना ब्याज दर वाले 1,000 NCDs इश्यू किए गए। इन NCDs की मैच्योरिटी 9 अप्रैल 2027 को होगी। इस डेट फाइनेंसिंग से कंपनी को अपने ऑपरेशन्स या विस्तार के लिए कैपिटल जुटाने का मौका मिला है, वो भी बिना अपनी मौजूदा इक्विटी को कम किए।
कंपनी की पृष्ठभूमि और हालिया मामले
साल 1991 में स्थापित और सितंबर 2025 में पब्लिक हुई यह फुल-सर्विस ब्रोकरेज फर्म कई चुनौतियों का सामना कर रही है। 13 मार्च 2026 को, SEBI ने आनंद राठी पर साइबर सुरक्षा और कंप्लायंस से जुड़ी खामियों के चलते ₹10 लाख का जुर्माना लगाया था। इससे पहले, 6 मार्च को कंपनी ने अपनी डिपॉजिटरी ऑपरेशंस में कथित ₹13 करोड़ की धोखाधड़ी की जांच के लिए Ernst & Young LLP को फोरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त करने की घोषणा की थी। इन मुद्दों के चलते मार्च 2026 के मध्य तक कंपनी के शेयर प्राइस में लगभग 27% की गिरावट आई थी।
असर और जिम्मेदारियां
₹10 करोड़ का यह फंड आनंद राठी को नई पूंजी प्रदान करेगा, हालांकि शेयरधारकों की इक्विटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं, नए NCDs कंपनी की डेट जिम्मेदारियों को बढ़ाते हैं, जिनके लिए समय पर ब्याज और मूल राशि का भुगतान करना होगा। इन भुगतानों में चूक होने पर, 9.5% कूपन रेट के अलावा NCDs पर 2% अतिरिक्त सालाना ब्याज भी लग सकता है। यह कैपिटल इन्फ्यूजन ऐसे समय में आया है जब कंपनी हालिया रेगुलेटरी चिंताओं के बीच अपने मौजूदा कर्ज को मैनेज कर रही है।
प्रतिस्पर्धी माहौल और वित्तीय स्थिति
भारत के प्रतिस्पर्धी कैपिटल मार्केट में, आनंद राठी का मुकाबला Motilal Oswal Financial Services, ICICI Securities, Angel One और 5Paisa Capital जैसी फर्मों से है। हाल ही में, फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में, आनंद राठी ने ₹2,482 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 21.5% अधिक था। वहीं, इसका प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 71.8% बढ़कर सामने आया। दिसंबर 2025 के अंत तक, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 94.9% था।
भविष्य की राह
निवेशक कंपनी की अपनी कर्ज जिम्मेदारियों को मैनेज करने की क्षमता पर नजर रखेंगे, जिसमें 9 अप्रैल 2027 को परिपक्व होने वाले इन NCDs का पुनर्भुगतान शामिल है। इसके साथ ही, वे कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस और रेगुलेटरी स्थिति पर भी ध्यान देंगे। निवेशकों के लिए प्रमुख क्षेत्र वे होंगे जहां कथित धोखाधड़ी की फोरेंसिक ऑडिट में प्रगति और SEBI के कंप्लायंस नियमों का पालन देखा जाएगा, जो कंपनी के गवर्नेंस और ऑपरेशनल इंटीग्रिटी का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
