Q4 में बढ़ी मुश्किलें, पूरे साल का घाटा भी ज्यादा
यह गिरावट सिर्फ Q4 तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) में भी कंपनी का रेवेन्यू 14.9% घटकर ₹5,831 मिलियन रहा। इस दौरान, नेट लॉस बढ़कर ₹2,182 मिलियन हो गया, जबकि FY25 में यह ₹845 मिलियन था।
डिजिटल पर फोकस, पारंपरिक मीडिया में गिरावट
इन नंबर्स के बीच, कंपनी ने अपने डिजिटल मीडिया सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके डिजिटल रेवेन्यू में 17.1% की ग्रोथ देखी गई है, और अब यह कंपनी के कुल रेवेन्यू का 47% तक पहुंच गया है। यह ग्रोथ कंपनी के पारंपरिक मीडिया बिजनेस में आई 50.5% की भारी गिरावट को कुछ हद तक सहारा दे रही है।
इन्वेंटरी क्लीनअप का असर
नतीजों पर एक और बड़ा असर कंपनी द्वारा की गई 'इन्वेंटरी क्लीनअप' (inventory cleanup) का रहा। पिछले नौ तिमाहियों में, Shemaroo ने लगभग ₹400 करोड़ के पुराने एसेट्स और कंटेंट को राइट-ऑफ (write-off) किया है। इस कदम का मकसद बैलेंस शीट को मजबूत करना और मैनेजमेंट को भविष्य की ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है। FY26 के अंत तक कंपनी पर कुल ₹300.60 करोड़ का कर्ज़ (debt) भी था।
इंडस्ट्री का कॉम्पिटिशन
Shemaroo एक ऐसे प्रतिस्पर्धी भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग में काम कर रही है, जहाँ डिजिटल स्पेस में ज़बरदस्त कॉम्पिटिशन है। दर्शकों की बदलती आदतों और एडवरटाइजिंग मॉडल के चलते, कंपनी के लिए अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे ShemarooMe, को मजबूत करना ज़रूरी है। इसी तरह, Zee Entertainment Enterprises Ltd. जैसी कंपनियां भी डिजिटल में शिफ्ट हो रही हैं, लेकिन उन्हें भी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।