फंड्स का हुआ पूरा इस्तेमाल, पर फाइलिंग में चूक
Orient Tradelink Limited ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया है कि अप्रैल 2025 में इक्विटी शेयरों के जरिए जुटाए गए ₹2,683.00 लाख यानी ₹26.83 करोड़ का पूरा उपयोग कर लिया गया है। इन फंड्स को वर्किंग कैपिटल के लिए ₹1,851.00 लाख (₹18.51 करोड़), बिजनेस एक्सपेंशन के लिए ₹57.00 लाख (₹0.57 करोड़) और इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट्स के लिए ₹775.00 लाख (₹7.75 करोड़) में बांटा गया है।
कंपनी ने स्वीकार किया है कि 1 अक्टूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के लिए यूटिलाइजेशन स्टेटमेंट (fund utilization statement) को सबमिट करने में एक प्रशासनिक देरी हुई थी। Orient Tradelink ने इस चूक के लिए माफी मांगी है और आश्वासन दिया है कि भविष्य में सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की समय पर फाइलिंग सुनिश्चित की जाएगी। कंपनी के ऑडिटर ने भी पुष्टि की है कि फंड्स का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है।
Q3 FY26 के नतीजे और कंपनी का बिजनेस
यह सब तब हुआ है जब कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए थे। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹4.13 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट ₹0.40 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, पहले नौ महीनों में कंपनी का रेवेन्यू ₹10.91 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹1.25 करोड़ रहा।
Orient Tradelink कई क्षेत्रों में काम करती है, जिसमें मूवी प्रोडक्शन, एंटरटेनमेंट कंटेंट मार्केटिंग और आध्यात्मिक उत्पाद शामिल हैं। हाल ही में कंपनी ने अपने ब्रांड 'Krishna Sai' के तहत FMCG सेक्टर में भी कदम रखा है। कंपनी ने हाल के समय में प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए पूंजी जुटाई है, जैसे जनवरी 2026 में लगभग ₹8.01 करोड़ और ₹9.30 करोड़, और अप्रैल 2025 में ₹55.65 लाख के अप्रूव्ड वारंट्स, जिनका उपयोग विस्तार और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए किया गया।
पिछला रेगुलेटरी ट्रैक रिकॉर्ड
यह ध्यान देने योग्य है कि कंपनी का रेगुलेटरी रिकॉर्ड पूरी तरह साफ नहीं रहा है। जनवरी 2026 में, कंपनी ने SEBI (ICDR) रेगुलेशंस के तहत प्रिफरेंशियल इश्यू के डिस्क्लोजर में गैर-अनुपालन का खुलासा किया था। इससे भी पहले, जनवरी 2020 में, SEBI ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर Aushim Khetarpal को टेकओवर नियमों और मार्केट मैनिपुलेशन के उल्लंघन के लिए ₹4.9 करोड़ प्लस ब्याज की राशि वापस करने का आदेश दिया था।
