AGM में क्या हुआ?
Kome-On Communication Ltd ने 19 मार्च, 2026 को अपनी 30वीं AGM का आयोजन किया। इस मीटिंग में शेयरहोल्डर्स ने 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट को मंजूरी दी। ज्यादातर सामान्य प्रस्तावों को भारी मतों से पास किया गया, जिसमें लगभग 87.56% वोट पक्ष में थे।
मीटिंग में डायरेक्टर्स की नियुक्ति की भी पुष्टि की गई। मिस्टर शंकर कोकाने और मिसेज रेनू बेनीवाल को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के तौर पर मंजूरी मिली। साथ ही, रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले मिस्टर आशीष राजेशभाई को डायरेक्टर के पद पर फिर से नियुक्त किया गया। रिमोट ई-वोटिंग 16 से 18 मार्च, 2026 तक उपलब्ध थी।
डीलिस्टिंग का मंडराता खतरा
हालांकि AGM में सामान्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े कदम उठाए गए, लेकिन यह कंपनी के गंभीर वित्तीय संकट और BSE से अनिवार्य डीलिस्टिंग की कार्यवाही के बीच हुआ। वित्तीय वर्ष 2023 के नतीजे पिछले कुछ वर्षों के बड़े घाटे के बाद कंपनी के प्रदर्शन का एक अपडेटेड व्यू देते हैं।
कंपनी की स्थापना 1994 में हुई थी और यह मुख्य रूप से फिल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में काम करती है। Kome-On Communication Ltd ने हाल के वर्षों में बड़े वित्तीय और रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना किया है। कंपनी BSE से अनिवार्य डीलिस्टिंग की प्रक्रिया में है, जिसके चलते इसके शेयर 16 अगस्त, 2024 से निलंबित हैं। पिछले वित्तीय वर्ष (31 मार्च, 2024 को समाप्त) में कंपनी ने जीरो रेवेन्यू और ₹13.28 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया था। कंपनी पर वित्तीय रिपोर्टिंग में देरी और कंप्लायंस के मुद्दे भी रहे हैं।
प्रमुख जोखिम और भविष्य की राह
शेयरों के निलंबन और डीलिस्टिंग की कार्यवाही कंपनी के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। कंपनी की गंभीर वित्तीय स्थिति, जैसे कि FY24 में शून्य रेवेन्यू और ₹13.28 करोड़ का नेट लॉस, साथ ही ₹-0.09 प्रति शेयर की निगेटिव बुक वैल्यू, चिंताजनक है। प्रमोटर्स की केवल 0.02% होल्डिंग भविष्य में कैपिटल इन्फ्यूजन की संभावना पर सवाल उठाती है।
इंडस्ट्री में, Kome-On Communication Ltd का मुकाबला बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड, वीआर फिल्म्स एंड स्टूडियोज लिमिटेड और बवेजा स्टूडियोज लिमिटेड जैसी कंपनियों से है। वहीं, सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियाँ मुनाफे में हैं।
निवेशक अब BSE से डीलिस्टिंग कार्यवाही पर अपडेट का इंतजार करेंगे, साथ ही कंपनी की कंप्लायंस की कोशिशें भी महत्वपूर्ण होंगी। आने वाले नतीजे यह दिखाएंगे कि कंपनी अपने घाटे और शून्य रेवेन्यू के ट्रेंड को बदल पाती है या नहीं।
