Interworld Digital पर ₹0.06 Cr का लोन डिफॉल्ट, पूर्व MD से विवाद से बढ़ी मुश्किलें!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Interworld Digital पर ₹0.06 Cr का लोन डिफॉल्ट, पूर्व MD से विवाद से बढ़ी मुश्किलें!
Overview

Interworld Digital Limited ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए **₹0.06 करोड़** के एक छोटे लोन डिफॉल्ट (Loan Default) की रिपोर्ट दी है। कंपनी पर कुल कर्ज़ बढ़कर **₹1.61 करोड़** हो गया है। इस कर्ज़ को चुकाने में कंपनी को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका मुख्य कारण पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) Man Mohan Gupta के साथ संपत्ति के हेरफेर (Asset Diversion) को लेकर चल रहा गंभीर विवाद है।

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डिफॉल्ट की वजह क्या है?

कंपनी ने अपनी लेटेस्ट फाइलिंग में बताया है कि यह डिफॉल्ट एक वाहन पर लिए गए लोन से जुड़ा है, जो कथित तौर पर Kotak Mahindra Prime Limited से लिया गया था। इस लोन में प्रिंसिपल और इंटरेस्ट का ₹0.01 करोड़ बकाया था, साथ ही ₹0.05 करोड़ का ड्यू इंटरेस्ट और चार्जेज़ थे। इस लोन पर 9.79% की सालाना ब्याज दर लागू थी।

कुल कर्ज़ और विवाद का असर

इस ₹0.06 करोड़ के डिफॉल्ट के अलावा, Interworld Digital पर ₹1.55 करोड़ के अन्य शॉर्ट-टर्म अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loans) भी बाकी हैं। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी की कुल फाइनेंशियल ऑब्लिगेशन्स ₹1.61 करोड़ हैं।

हालांकि डिफॉल्ट की राशि छोटी है, लेकिन यह Interworld Digital पर फाइनेंशियल दबाव को साफ दिखाती है। इस स्थिति को पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर Man Mohan Gupta के साथ चल रहे एक बड़े विवाद ने और गंभीर बना दिया है। मिस्टर गुप्ता पर कंपनी की संपत्तियों को धोखाधड़ी से हड़पने (Fraudulent Asset Diversion) के आरोप हैं, और कहा जा रहा है कि वह कर्ज़ चुकाने में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस टकराव की वजह से कंपनी की कर्ज़ चुकाने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है और गवर्नेंस को लेकर भी जोखिम बढ़ गया है।

कंपनी का बिज़नेस और पुरानी समस्याएं

Interworld Digital Limited, जिसे पहले Interworld.Com Ltd. के नाम से जाना जाता था, एंटरटेनमेंट सेक्टर में IT-एनेबल्ड और डिजिटल सिनेमा सर्विसेज का काम करती है। कंपनी कई बड़े गवर्नेंस चैलेंजेज़ से जूझ रही है। एक ऑडिटर की रिपोर्ट में पूर्व MD Man Mohan Gupta द्वारा कथित धोखाधड़ी का जिक्र है, जिन पर कंपनी के बिज़नेस और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को हड़पने का आरोप है। इस कथित हेरफेर के कारण फाइनेंशियल ईयर 2024-2025 में कंपनी का रेवेन्यू शून्य रहा।

अपनी वित्तीय मुश्किलों के चलते, Interworld Digital पर FY 2009-10 से ₹1.91 करोड़ का स्टैचूटरी ड्यूज़ (Statutory Dues) भी बकाया है। इसके अलावा, FY 2018-19 से अनपेड BSE लिस्टिंग फीस (BSE Listing Fees) के कारण स्टॉक पर ट्रेडिंग रिस्ट्रिक्शन्स (Trading Restrictions) लगी हुई हैं, जिससे शेयर हफ्ते में सिर्फ एक दिन 'ट्रेड-फॉर-ट्रेड' बेसिस पर ट्रेड हो पा रहे हैं।

आगे की राह और पीयर कंपैरिजन

मुख्य जोखिम पूर्व MD Man Mohan Gupta के साथ चल रहा विवाद है, जिसमें संपत्ति हड़पने के आरोप और कर्ज़ चुकाने में सहयोग न करना शामिल है। यह विवाद कर्ज़ समाधान को जटिल बना रहा है, ऑपरेशनल स्टेबिलिटी को खतरे में डाल रहा है, और FY24-25 में शून्य रेवेन्यू के लिए भी जिम्मेदार है। ऑडिटर ₹1.47 करोड़ के अनकोटेड इन्वेस्टमेंट्स (Unquoted Investments) का वैल्यूएशन नहीं कर पा रहे हैं, जो बैलेंस शीट की पारदर्शिता को और कम करता है।

सिर्फ पूर्व MD का मामला ही नहीं, बल्कि ₹1.91 करोड़ का स्टैचूटरी ड्यूज़ और अनपेड BSE लिस्टिंग फीस, जो सख्त ट्रेडिंग रिस्ट्रिक्शन्स का कारण बनी हैं, वो भी बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं। ये सभी फैक्टर मिलकर फाइनेंशियल जांच बढ़ा रहे हैं, कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे हैं, और शेयरधारकों के लिए लिक्विडिटी (Liquidity) को सीमित कर रहे हैं।

मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में Interworld Digital के कॉम्पेटिटर्स (Competitors) में Filmcity Media Limited, Sri Adhikari Brothers Television Network Ltd., और Vision Corporation Ltd. शामिल हैं। Interworld Digital की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) लगभग ₹10-11 करोड़ है, जो पीयर मीडियन ₹10 करोड़ के करीब है। हालांकि, Interworld Digital अपने पीयर्स की तुलना में प्राइस-टू-बुक (P/B) बेसिस पर काफी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है, जिसका P/B रेश्यो मार्च 2026 तक 0.13 है, जबकि पीयर मीडियन 0.67 है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशक ₹0.06 करोड़ के लोन डिफॉल्ट और अन्य बकाया कर्ज़ों को सुलझाने की दिशा में प्रगति देखेंगे। पूर्व MD Man Mohan Gupta और कथित संपत्ति हड़पने से जुड़े कानूनी कदमों या रिकवरी प्रयासों में होने वाले घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे। कंपनी की अनपेड BSE लिस्टिंग फीस और स्टैचूटरी ड्यूज़ को क्लियर करने की योजनाएं, साथ ही ऑपरेशनल रिकवरी या संपत्ति की वापसी के कोई भी संकेत भी बारीकी से देखे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, समय पर और पूरी फाइनेंशियल रिपोर्टिंग का वापस शुरू होना भी बेहद जरूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.