सेबी के नियमों का क्या मतलब?
Craftroot Retail Limited ने 29 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर कन्फर्म किया है कि वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के रूप में योग्य नहीं है। कंपनी ने अपनी नवीनतम समीक्षा के आधार पर बताया कि वह लार्ज कॉर्पोरेट वर्गीकरण के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करती है। यह जानकारी डेट (Debt) के जरिए फंड जुटाने वाली कंपनियों के लिए सेबी के दिशानिर्देशों के अनुरूप है।
फंड जुटाने में मिलेगी आज़ादी
सेबी के 'लार्ज कॉर्पोरेट' स्टेटस के अनुसार, कुछ कंपनियों को अपनी नई बरोइंग्स (Borrowings) का एक निश्चित हिस्सा डेट सिक्योरिटीज के जरिए जुटाना अनिवार्य होता है। चूंकि Craftroot Retail इस परिभाषा के दायरे में नहीं आती, इसलिए यह कंपनी ऐसे किसी भी अनिवार्य डेट जारी करने के लक्ष्य से बंधी नहीं है। इससे कंपनी को अपने फाइनेंसिंग के तरीके चुनने में अधिक आज़ादी मिल गई है।
सेबी का 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क
सेबी ने नवंबर 2018 में कॉर्पोरेट डेट मार्केट को बढ़ाने और बैंकों पर निर्भरता कम करने के मकसद से 'लार्ज कॉर्पोरेट' नियम पेश किए थे। शुरुआत में, एक LC वह लिस्टेड कंपनी (बैंकों को छोड़कर) होती थी जिसकी ₹100 करोड़ या उससे अधिक की लॉन्ग-टर्म बरोइंग्स होती थीं और 'AA' क्रेडिट रेटिंग होती थी। इन LCs को अपनी नई बरोइंग्स का 25% डेट सिक्योरिटीज के जरिए जुटाना पड़ता था। बाद में, सेबी ने अक्टूबर 2023 में इन नियमों को अपडेट किया और बरोइंग की सीमा को बढ़ाकर ₹1000 करोड़ या उससे अधिक कर दिया।
Craftroot Retail के लिए इसका महत्व
यह कन्फर्मेशन कंपनी के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि अब यह LC डेट जारी करने के मैंडेट (अनिवार्यता) के अधीन नहीं है। इसका मतलब है कि Craftroot Retail अपनी फाइनेंसिंग के लिए मौजूदा या सामान्य तरीकों का इस्तेमाल करना जारी रख सकती है, बजाय किसी विशेष लार्ज-स्केल डेट टारगेट को पूरा करने के। यह वर्गीकरण यह भी बताता है कि कंपनी का वर्तमान ऑपरेशनल पैमाना और बरोइंग का स्तर सेबी के LC थ्रेशोल्ड (सीमा) से नीचे है।
कंपनी के आंकड़े
31 दिसंबर 2025 तक की जानकारी के अनुसार, Craftroot Retail ने पिछले बारह महीनों में लगभग 44,000 अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया था।
