यह मीटिंग क्रेडिटर (Creditors) के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसी में कंपनी के फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग (Financial Restructuring) और इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (Insolvency Proceedings) से जुड़े अहम फैसले लिए जाएंगे। यह मीटिंग रिकवरी एफर्ट्स (Recovery Efforts) की दिशा तय करेगी।
Videocon ग्रुप की कन्सॉलिडेटेड इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (Consolidated Insolvency Resolution Process) जून 2018 से चल रही है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 8 अगस्त, 2019 को 13 Videocon ग्रुप एंटिटीज़ को एक साथ इस प्रक्रिया में शामिल किया था। कंपनी के शेयर्स का ट्रेड 16 जून, 2021 से BSE और NSE पर बंद है। NCLT द्वारा जून 2021 में मंजूर की गई एक पिछली रेजोल्यूशन प्लान को जनवरी 2022 में अपीलेट ट्रिब्यूनल ने पलट दिया था, जिसके बाद मामला क्रेडिटर के पास वापस चला गया। अभिजीत गुहाताकुरता (Abhijit Guhathakurta) इस पूरी प्रक्रिया को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) के तौर पर देख रहे हैं।
इस प्रक्रिया के इतने सालों तक खिंचने से Videocon की फाइनेंशियल प्रॉब्लम को सुलझाने में आ रही दिक्कतों का अंदाजा लगाया जा सकता है। लीगल प्रोसीडिंग्स (Legal Proceedings) में और देरी या कॉम्प्लिकेशन्स (Complications) का खतरा बना हुआ है। SEBI द्वारा इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) पर लगाए गए जुर्माने और एसेट अटैचमेंट (Asset Attachments) जैसे पिछले रेगुलेटरी एक्शन (Regulatory Actions) कंपनी के गवर्नेंस (Governance) से जुड़े कंसर्न्स (Concerns) को दर्शाते हैं। प्रमोटर वेणुगोपाल धूत (Venugopal Dhoot) के पर्सनल इनसॉल्वेंसी (Personal Insolvency) के मामले भी रिकवरी के प्रयासों को और जटिल बना रहे हैं। Reliance Communications और HDIL जैसे लंबे इनसॉल्वेंसी केस भी भारत में ऐसी प्रक्रियाओं की मुश्किल और लंबी प्रकृति को बताते हैं।