कर्ज़ के बोझ तले दबी कंपनी, लेनदारों के हाथों में भविष्य
यह नॉन-ऑपरेशनल कंपनी अब अपने लेनदारों के नियंत्रण में है। 19 फरवरी, 2026 से शुरू हुई इस प्रक्रिया का मकसद कंपनी को चलाने या उसकी संपत्तियों को बेचकर कर्ज़ चुकाने का रास्ता खोजना है। कंपनी पर कुल ₹59,484 करोड़ का कर्ज़ है, जो इसकी गंभीर आर्थिक तंगी को दर्शाता है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया 18 अगस्त, 2026 तक पूरी हो जाएगी।
2012 से बंद पड़ी है फैक्ट्री, हालत बेहद खराब
Telephone Cables Ltd पहले बिजली के तार और केबल बनाने का काम करती थी, लेकिन 2012 से कंपनी पूरी तरह बंद पड़ी है। इसकी 26.23 एकड़ की फैक्ट्री ज़मीन अब बेहद खराब हालत में है। चारों ओर उगी झाड़ियां, टूटी-फूटी बिल्डिंगें और जंग लगी पुरानी मशीनरी के कारण इसका आकलन करना भी मुश्किल हो रहा है।
मैनेजमेंट कंट्रोल में बड़ा बदलाव, पूर्व डायरेक्टर सहयोग नहीं कर रहे
इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया के तहत, एक अंतरिम प्रोफेशनल (Interim Professional) कंपनी और उसकी संपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है। डायरेक्टर्स के अधिकार निलंबित कर दिए गए हैं, और पूर्व मैनेजमेंट से ज़रूरी जानकारी हासिल करने में सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे रेजोल्यूशन (Resolution) की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
आगे की राह में क्या हैं चुनौतियां?
कंपनी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। फैक्ट्री की खस्ताहाल हालत, वहां पहुंच और सुरक्षा बनाए रखने में दिक्कतें पैदा कर सकती है। पूर्व डायरेक्टर्स से जानकारी का अभाव भी अहम है। कबाड़ हो चुकी मशीनरी का मूल्यांकन और उसकी बिक्री भी एक बड़ी मुश्किल साबित हो सकती है। ₹59,000 करोड़ का विशाल कर्ज़ इस कंपनी की गंभीर वित्तीय स्थिति को बयां करता है।
एक्टिव केबल मार्केट के मुकाबले पिछड़ी
जहां Telephone Cables Ltd बंद पड़ी है, वहीं भारत का केबल और तार सेक्टर काफी सक्रिय है। Polycab India Ltd और KEI Industries Ltd जैसी कंपनियां इस सेक्टर में लगातार तरक्की कर रही हैं। FY23 में Polycab ने करीब ₹12,000 करोड़ का रेवेन्यू कमाया, जबकि KEI Industries का रेवेन्यू लगभग ₹7,700 करोड़ रहा।
महत्वपूर्ण तारीखें और आगे क्या देखना है?
इन्सॉल्वेंसी की प्रक्रिया 19 फरवरी, 2026 को शुरू हुई। लेनदारों की पहली अहम मीटिंग 20 मार्च, 2026 को होनी तय है। निवेशक इस मीटिंग पर पैनी नज़र रखेंगे। इस मीटिंग में रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) की नियुक्ति, आगे की योजना, और संभावित खरीदारों की दिलचस्पी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। फैक्ट्री और मशीनरी की खराब हालत भी आगे के फैसलों में एक बड़ा फैक्टर रहेगी।
