Tijaria Polypipes: शेयरधारकों के लिए बड़ा झटका! कर्ज सेटलमेंट की अर्जी कोर्ट में खारिज, बैंक का फैसला बरकरार

LAWCOURT
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AuthorNeha Patil|Published at:
Tijaria Polypipes: शेयरधारकों के लिए बड़ा झटका! कर्ज सेटलमेंट की अर्जी कोर्ट में खारिज, बैंक का फैसला बरकरार
Overview

Tijaria Polypipes Limited को बड़ा झटका लगा है। Rajasthan High Court ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें वह Bank of India को One-Time Settlement (OTS) के ऑफर को मानने के लिए मजबूर करना चाहती थी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सेटलमेंट पर फैसला लेने का अधिकार बैंक का है।

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कोर्ट का फैसला क्या कहता है?

Rajasthan High Court ने Tijaria Polypipes Limited की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसके ज़रिए कंपनी अपनी Bank of India की One-Time Settlement (OTS) की पेशकश को स्वीकार करने के लिए मजबूर करना चाहती थी। कोर्ट ने बैंक के फैसले को सही ठहराया है और कहा है कि सेटलमेंट को स्वीकार करना या न करना बैंक का अपना व्यावसायिक निर्णय (business judgment) है।

क्या था कंपनी का प्रस्ताव?

Tijaria Polypipes ने Bank of India के ₹74.00 करोड़ के मूल ऋण (principal debt) को निपटाने के लिए ₹53.67 करोड़ का प्रस्ताव दिया था। इस मामले में कंपनी पहले ही ₹12 करोड़ जमा कर चुकी थी।

अब कंपनी के पास क्या विकल्प?

इस कोर्ट के फैसले से Tijaria Polypipes के लिए एक बड़ा कानूनी रास्ता बंद हो गया है, जिससे वह बैंक पर सेटलमेंट के लिए दबाव बना सके। अब कंपनी को अपने भारी कर्ज को चुकाने के लिए सीधे बैंक के साथ बातचीत करनी होगी या फिर दूसरे वित्तीय समाधान खोजने होंगे।

कंपनी की गंभीर वित्तीय हालत

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब Tijaria Polypipes पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है।

  • Bank of India ने कंपनी के खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया है।
  • कंपनी पर ₹71 करोड़ से ज़्यादा का बकाया है।
  • हाल की कई तिमाहियों से कंपनी का संचालन राजस्व (operating revenue) शून्य है।
  • कंपनी को भारी नेट लॉस (net loss) हो रहा है।
  • इसके अलावा, कंपनी पर काफी ज़्यादा कर्ज है और उसकी अपनी पूंजी (net worth) नेगेटिव में है।

पुराने मामले और भविष्य की राह

Bank of India ने कंपनी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में भी मामले दर्ज कराए हैं, जिनकी सुनवाई 2026 की शुरुआत में होनी है।

कंपनी और उसके डायरेक्टर्स का नियामक इतिहास भी सवालों के घेरे में रहा है। SEBI ने 2011 के IPO में प्रॉस्पेक्टस में कथित उल्लंघनों की जांच की थी, और इसी प्रॉस्पेक्टस में झूठे बयान देने के लिए इसके डायरेक्टर्स को मार्च 2026 में दोषी भी ठहराया गया था।

आगे क्या होगा?

  • Tijaria Polypipes ने कोर्ट के ज़रिए बैंक से कम राशि में सेटलमेंट कराने का कानूनी अधिकार खो दिया है।
  • अब कंपनी को सीधे बैंक के साथ मोलभाव (negotiation) करना होगा या कर्ज चुकाने के अन्य तरीके खोजने होंगे।
  • Bank of India अब बकाया पूरी राशि की वसूली के लिए और तेज़ी से कदम उठा सकता है, संभवतः NCLT के रास्ते।
  • कंपनी की लगातार शून्य राजस्व की स्थिति उसकी अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.