मशीनरी विवाद: Himalaya Food ने Simplot को घेरा
Himalaya Food International Ltd अब Simplot पर कानूनी शिकंजा कस रही है। कंपनी ने सिंगापूर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) में ₹72 करोड़ की भारी भरकम डैमेजेज़ की मांग की है। आरोप है कि Simplot कंपनी की जरूरी मशीनरी को वापस लौटाने में नाकाम रही है। इस मशीनरी के न मिलने से Himalaya Food का उत्पादन FY2020-21 और FY2021-22 के दौरान काफी रुका रहा, जिससे कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
सिर्फ SIAC तक ही बात नहीं रुकी है। Himalaya Food ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की है। इसमें मांग की गई है कि Simplot द्वारा वापस न की गई कस्टम इक्विपमेंट (custom equipment) की वैल्यू (value) तय की जाए। इस बीच, SIAC में आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया तेज गति से चलने की उम्मीद है, जिसके लिए लगभग SGD 250,000 का बजट भी तय किया गया है।
यह आर्बिट्रेशन केस दोनों कंपनियों के बीच चल रहे कानूनी विवादों की एक और कड़ी है। इससे पहले मार्च 2020 में भी SIAC ने एक फैसले में Simplot को आलू प्रोसेसिंग लाइन्स के रिफंड के साथ-साथ Himalaya Food की मशीनरी लौटाने का आदेश दिया था। इन दोनों कंपनियों के बीच पहले भी कई अदालती मामले और पेचीदा कानूनी बहसें हो चुकी हैं।
फिलहाल, यह नया केस सीधे तौर पर मशीनरी विवाद के वित्तीय असर को दिखाता है। अगर यह आर्बिट्रेशन Himalaya Food के पक्ष में जाता है, तो कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है और प्रोडक्शन क्षमता में भी सुधार आ सकता है। हालांकि, Simplot द्वारा पहले के कानूनी फैसलों का पालन न करने जैसी चुनौतियां भी हैं।
शेयरहोल्डर्स (Shareholders) की नजरें अब इस आर्बिट्रेशन की प्रगति और इसके संभावित वित्तीय नतीजों पर टिकी होंगी। Himalaya Food अपने इस कानूनी सफर को जारी रखने के लिए फंड जुटाने के तरीकों पर भी विचार कर रही है। यह देखना अहम होगा कि कंपनी ₹72 करोड़ की पूरी डैमेजेज़ राशि वसूल कर पाती है या नहीं, जो आर्बिट्रेशन के नतीजे और किसी भी संभावित ग्लोबल सेटलमेंट पर निर्भर करेगा। निवेशकों को SIAC की कार्यवाही, दिल्ली हाईकोर्ट के मामले और कंपनी की लिटिगेशन फंडिंग (litigation funding) की रणनीतियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
